“जांच के दौरान पहले सत्कार, फिर समझौते की बात?”
“66 लाख भुगतान में न किसी का हस्ताक्षर, न मौके पर मिली फर्म… आखिर किसके नाम निकला वाउचर?”
“मंगलापुर में कथित फर्जी भुगतान का मामला, एडीओ (पंचायत), जूनियर इंजीनियर व सचिव सहित तीन सदस्यीय टीम ने की जांच”
मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज। नौतनवा विकास खंड की ग्राम पंचायत मंगलापुर में कथित 66 लाख रुपये के भुगतान मामले की जांच के बाद शिकायतकर्ता हरिशंकर ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि एडीओ (पंचायत), जूनियर इंजीनियर और सचिव सहित तीन सदस्यीय टीम गांव पहुंची थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर संबंधित फर्म के अस्तित्व पर सवाल उठाए और कहा कि मौके पर फर्म या दुकान नहीं मिली। उनका यह भी दावा है कि जांच में देखे गए वाउचर पर संबंधित फर्म संचालक के हस्ताक्षर नहीं थे, जिस पर सवाल उठा कि बिना हस्ताक्षर के वाउचर और भुगतान किस आधार पर पारित हुआ। उनके अनुसार, जांच टीम ने सोमवार को ब्लॉक कार्यालय बुलाकर पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात भी कही।

शिकायतकर्ता हरिशंकर का आरोप है कि जांच के बाद ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) उमेश यादव ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया। उनके अनुसार, पहले चाय, मीठा और बोतलबंद पानी मंगवाया गया, जिसके बाद सचिव ने कथित रूप से मामले को “मैनेज” करने और समझौते का सुझाव दिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि बातचीत के दौरान अप्रत्यक्ष रूप से पैसों का भी इशारा किया गया और कहा गया कि यदि एफआईआर दर्ज हुई तो संबंधित लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी। हरिशंकर का कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार के समझौते या दबाव को ठुकराते हुए स्पष्ट कर दिया कि उन्हें खरीदा नहीं जा सकता और वह मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
वहीं, मामले में सचिव उमेश यादव ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उनका कार्यकाल ग्राम पंचायत में लगभग ढाई वर्ष का है। उनके अनुसार, उनके कार्यकाल में करीब 12 से 14 लाख रुपये का भुगतान हुआ है, जिसका ऑनलाइन रिकॉर्ड तथा संबंधित बिल-वाउचर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित फर्म की दुकान करीब एक वर्ष पहले तक मौजूद थी, हालांकि वर्तमान में वहां दुकान नहीं है। दूसरी ओर, कथित फर्म संचालक के भाई ने दावा किया कि उक्त स्थान पर कभी कोई दुकान नहीं थी, बल्कि केवल एक आटा चक्की संचालित होती थी और वर्तमान में वहां फर्म के नाम का केवल एक बोर्ड लगा है।
जांच रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।