मनोज कुमार त्रिपाठी
भैरहवा (नेपाल)। एशियन बुद्धा होटल से कुछ ही दूरी पर स्थित ऐतिहासिक बसडिलवा शिव मंदिर आज श्रद्धालुओं की आस्था, जनसहयोग और समर्पण की अनूठी मिसाल बन चुका है। मंदिर समिति का दावा है कि नेपाल सरकार से अब तक किसी भी प्रकार का आर्थिक सहयोग नहीं मिलने के बावजूद मंदिर का लगातार विकास केवल श्रद्धालुओं के दान, चढ़ावे और यज्ञों से जुटाए गए सहयोग से किया जा रहा है।

द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज से विशेष बातचीत में मंदिर के कोषाध्यक्ष विशाल चौधरी ने बताया कि नई समिति के गठन के बाद मंदिर परिसर में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य कराए गए हैं। जलकुंड के ऊपर भगवान भोलेनाथ की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई, वहीं श्रद्धालुओं के सहयोग से 108 शिवलिंगों की स्थापना भी की गई है। समिति जल्द ही सभी दानदाताओं के सम्मान में शिलालेख भी स्थापित करेगी।

उन्होंने बताया कि हाल ही में मंदिर परिसर में 108 फीट ऊंचे विशाल त्रिशूल की स्थापना की गई है, जिस पर लगभग 15 से 16 लाख नेपाली रुपये की लागत आई है। समिति का दावा है कि यह वर्तमान में नेपाल का सबसे ऊंचा त्रिशूल है, जो मंदिर की नई पहचान बन चुका है।
विशाल चौधरी ने स्पष्ट कहा कि इस त्रिशूल सहित मंदिर के सभी विकास कार्य किसी सरकारी बजट से नहीं, बल्कि मंदिर समिति द्वारा आयोजित यज्ञ, दान-पेटी में मिलने वाले चढ़ावे और श्रद्धालुओं के सहयोग से पूरे किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार से अब तक मंदिर के विकास के लिए कोई आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं हुई है।
मंदिर समिति ने नेपाल सरकार से इस ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर के संरक्षण एवं विकास में सहयोग देने की मांग की है। समिति का कहना है कि यदि सरकारी सहयोग मिले तो यह प्राचीन शिव धाम धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केंद्र बन सकता है।