मनोज कुमार त्रिपाठी
बुटवल। वित्तीय और चिकित्सा क्षेत्र समेत विभिन्न जनसरोकार के मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे दुर्गा प्रसाई नेतृत्व वाले राष्ट्र, राष्ट्रीयता, धर्म, संस्कृति एवं नागरिक बचाउ महाअभियान ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। अभियान ने चेतावनी दी है कि यदि तत्कालीन सरकार के साथ हुए 12 सूत्री समझौते को 11 श्रावण तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया, तो 12 श्रावण से आंदोलन को और अधिक आक्रामक बनाया जाएगा।
रूपन्देही के बुटवल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभियान के समन्वयक दुर्गा प्रसाई ने कहा कि महाअभियान ने गत माघ 2, 2082 बीएस को तत्कालीन सरकार के साथ 12 सूत्री समझौता किया था। समझौते में भूमिहीन, सुकुम्बासी एवं अव्यवस्थित बसोबासी की समस्या के समाधान से लेकर बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं और मीटरब्याज से पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल थे।
अभियान के केंद्रीय संगठन विभाग प्रमुख प्रेम थापा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। उन्होंने सरकार को 11 श्रावण तक का समय देते हुए कहा कि भूमिहीन-अतिक्रमणकारियों तथा वित्तीय क्षेत्र से पीड़ित लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए। मांगें पूरी नहीं होने पर सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी गई।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए महाअभियान किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार है।
वहीं, महाअभियान के केंद्रीय सचिव शंकर कोइराला ने आरोप लगाया कि बैंक, सहकारी संस्थाओं, मीटरब्याजियों और अन्य वित्तीय संस्थाओं से पीड़ित लाखों नागरिकों की समस्याओं के समाधान को लेकर सरकार गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि वित्तीय शोषण के कारण कई लोगों ने आत्महत्या की, कई परिवार बेघर हुए, अनेक लोग विदेश पलायन करने को मजबूर हुए और बड़ी संख्या में लोग सामाजिक एवं मानसिक तनाव झेल रहे हैं।
कोइराला ने दो टूक कहा—“पीड़ितों को न्याय नहीं मिलने तक हम पीछे नहीं हटेंगे।”
12 सूत्री समझौते में क्या था?
दुर्गा प्रसाई नेतृत्व वाले महाअभियान और तत्कालीन सरकार के बीच हुए 12 सूत्री समझौते में भूमिहीन, सुकुम्बासी और अव्यवस्थित बसोबासी की समस्या का समाधान, बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं तथा मीटरब्याज से पीड़ितों को न्याय, कर्मचारियों के वेतन-भत्ते में वृद्धि और मेडिकल शिक्षा के लिए विद्यार्थियों के कोटा में बढ़ोतरी समेत कई मुद्दे शामिल थे।
अब महाअभियान ने सरकार को 11 श्रावण तक का वक्त दिया है। ऐसे में 12 श्रावण से आंदोलन तेज करने की घोषणा ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यदि तय समयसीमा में समझौते के बिंदुओं पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो बुटवल समेत अन्य क्षेत्रों में आंदोलन का स्वरूप और व्यापक होने की संभावना है।