भारत-नेपाल सीमा पर भंसार विवाद गहराया: भारतीय एजेंटों का अनिश्चितकालीन धरना, मांगें नहीं मानी गईं तो भारत-नेपाल व्यापार पूरी तरह ठप करने की चेतावनी

मनोज कुमार त्रिपाठी 

सोनौली/भैरहवा। भारत-नेपाल सीमा पर भंसार (कस्टम) व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। वर्षों से नेपाल भंसार में कार्य कर रहे भारतीय एजेंटों एवं उनके सहयोगियों ने प्रशासनिक भवन में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के विरोध में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था से सैकड़ों भारतीय परिवारों की आजीविका पर संकट आ गया है। वहीं नेपाल भंसार एजेंट महासंघ का कहना है कि किसी के काम पर रोक नहीं लगाई गई है, बल्कि केवल प्रशासनिक भवन में प्रवेश को नियमों के तहत सीमित किया गया है।

20-25 वर्षों से कर रहे हैं काम, अब प्रवेश से रोका जा रहा : विरेंद्र सिंह

धरने में शामिल विरेंद्र सिंह ने बताया कि वह और उनके सैकड़ों साथी पिछले 20 से 25 वर्षों से नेपाल भंसार से जुड़े कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार अब भारतीय नागरिक होने के कारण उन्हें भंसार के प्रशासनिक भवन में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर भारतीय लोगों को अंदर जाने से रोका जा रहा है, जिससे वर्षों से कार्य कर रहे अनेक लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

विरेंद्र सिंह का दावा है कि इस संबंध में नेपाल सरकार की ओर से कोई लिखित आदेश उन्हें नहीं दिखाया गया है। उनके अनुसार यह व्यवस्था नेपाल एजेंट महासंघ की ओर से लागू की जा रही है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा तथा भारत-नेपाल सीमा पर सभी प्रकार के आयात-निर्यात कार्य और माल की आवाजाही पूरी तरह रोक दी जाएगी। उनका कहना है कि वर्षों से इस कार्य से जुड़े लोगों की आजीविका की रक्षा के लिए यह कदम उठाना उनकी मजबूरी होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका भुगतान किसी एजेंट द्वारा नहीं बल्कि सीधे संबंधित पार्टी द्वारा किया जाता है, इसलिए भारतीय सहयोगियों को हटाने से पूरी कार्य व्यवस्था प्रभावित होगी।

दीपक बाबा बोले— समाधान निकले, वर्षों से काम कर रहे लोगों के हितों की रक्षा हो

वरिष्ठ नेता दीपक बाबा ने भारतीय प्रशासन और भारतीय कस्टम विभाग पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय प्रशासन पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है और जनप्रतिनिधि भी स्थिति से अवगत हैं।

उन्होंने कहा कि यदि नेपाल सरकार प्रत्येक एजेंट के साथ केवल दो अधिकृत प्रतिनिधियों को रखने की व्यवस्था कर रही है तो उन प्रतिनिधियों में भारतीय लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वर्षों से कार्य कर रहे लोगों का रोजगार प्रभावित न हो।

उन्होंने सवाल उठाया कि जो कार्य अब तक सैकड़ों लोग मिलकर करते रहे हैं, क्या वह केवल दो या तीन लोग कर पाएंगे।

दीपक बाबा ने नेपाल सरकार से अपील की कि यदि नई व्यवस्था लागू करनी थी तो उसे तत्काल लागू करने के बजाय कुछ समय दिया जाना चाहिए था, विशेषकर तब जब भारत की ओर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) का निर्माण कार्य अभी जारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारतीय दूतावास (एम्बेसी) द्वारा जारी पहचान पत्र के आधार पर भारतीय नागरिक नेपाल में अन्य वैध कार्य कर सकते हैं, तो भंसार व्यवस्था में भी ऐसे कार्डों को उचित महत्व मिलना चाहिए।

जमीन और एम्बेसी कार्ड के नाम पर वसूली के आरोप

धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि नेपाल भंसार एजेंट महासंघ के अध्यक्ष द्वारा जमीन उपलब्ध कराने के नाम पर ₹15,000 से ₹20,000 तक की राशि ली गई। इसके अलावा भारतीय दूतावास (एम्बेसी) के कार्ड बनवाने के नाम पर भी ₹2,000 प्रति कार्ड वसूले जाने का आरोप लगाया गया।

इस मुद्दे पर दीपक बाबा ने कहा कि यदि वास्तव में जमीन और एम्बेसी कार्ड के नाम पर लोगों से धन लिया गया है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से पैसे लिए गए हैं, उन्हें उसका स्पष्ट हिसाब दिया जाना चाहिए और यदि किसी प्रकार का वादा किया गया था तो उसे पूरा किया जाना चाहिए।

नेपाल एजेंट संघ के पूर्व अध्यक्ष शांत कुमार शर्मा ने आरोपों को किया खारिज

नेपाल भंसार एजेंट संघ के पूर्व अध्यक्ष शांत कुमार शर्मा ने आंदोलनकारियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों के नेपाल भंसार क्षेत्र में आने-जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रशासनिक भवन (Administrative Block) में प्रवेश के लिए नियम लागू किया गया है। नेपाल सरकार के नियमों के अनुसार केवल अधिकृत नेपाल भंसार एजेंट और उनके दो अधिकृत नेपाली प्रतिनिधि ही प्रशासनिक भवन में प्रवेश कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे अधिकांश लोग अधिकृत भंसार एजेंट नहीं बल्कि बिचौलिये हैं, जिनके पास न नेपाल का भंसार एजेंट लाइसेंस है और न ही आवश्यक वैधानिक अनुमति।

‘काम पर रोक नहीं, केवल प्रशासनिक भवन में प्रवेश सीमित’

शांत कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय नागरिक पहले की तरह भंसार यार्ड में जा सकते हैं, माल की जांच करा सकते हैं, लोडिंग-अनलोडिंग कर सकते हैं, गाड़ियों को पास करा सकते हैं और अन्य सभी कार्य कर सकते हैं। केवल प्रशासनिक भवन में गैर-नेपाली नागरिकों के प्रवेश पर रोक है।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और राजस्व संरक्षण के उद्देश्य से लागू की गई है।

₹2,000 कार्ड शुल्क पर भी दिया जवाब

शांत कुमार शर्मा ने कहा कि एम्बेसी कार्ड के नाम पर वर्तमान में ₹2,000 नहीं लिया जा रहा है। उनके अनुसार पहले अलग व्यवस्था थी, जबकि अब कार्ड भंसार विभाग की प्रक्रिया के माध्यम से जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की शिकायत है तो उसकी जांच संबंधित स्तर पर कराई जा सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सहयोगियों के लिए अलग पहचान पत्र (कार्ड) बनवाने में कोई आपत्ति नहीं है, ताकि वे भंसार क्षेत्र में सुगमता से आ-जा सकें, लेकिन प्रशासनिक भवन में प्रवेश सरकार के नियमों के अनुसार ही होगा।

उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि वे आंदोलन समाप्त करें तथा भारत-नेपाल की मित्रता और दोनों देशों के कानूनों का सम्मान करें।

दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम

एक ओर भारतीय पक्ष का कहना है कि नई व्यवस्था से वर्षों से कार्य कर रहे भारतीय एजेंटों और सहयोगियों की आजीविका प्रभावित होगी और वर्तमान व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। दूसरी ओर नेपाल एजेंट संघ का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक भवन में प्रवेश से जुड़ा नियम है, सामान्य कार्यों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और अधिकृत एजेंटों के माध्यम से पूरा कार्य पहले की तरह जारी रहेगा।

फिलहाल यह विवाद भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार, परिवहन और कस्टम व्यवस्था से जुड़े हजारों लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें दोनों देशों के प्रशासन और सरकारों के अगले निर्णय पर टिकी हैं।

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