उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! महराजगंज जिले के फरेंदा तहसील क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली श्रीनगर झील आज बदहाली का शिकार बनी हुई है। कभी जल संचयन, सिंचाई और मत्स्य पालन का प्रमुख केंद्र रही यह झील अब उपेक्षा के कारण सूखती जा रही है।

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से झील के सुंदरीकरण, बैराज निर्माण और नहरों की मरम्मत की मांग उठाई है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य मोहन प्यारे और ग्रामीणों का कहना है कि यह झील करीब 105 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जहां पहले जल संचयन की बेहतरीन व्यवस्था थी। यहां से कई नहरें निकलती थीं जिनसे दूर-दूर तक खेतों की सिंचाई होती थी। साथ ही यहां मत्स्य पालन से सरकार को भी अच्छा राजस्व मिलता था। लेकिन समय के साथ नहरें जर्जर हो गईं और झील की स्थिति भी खराब होती चली गई।

कमलपुर के प्रधान पति राधेश्याम यादव ने बताया कि श्रीनगर झील पहले एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी रही है। यहां पानी रोकने के लिए बैराज और फाटक लगाए गए थे, जिससे झील में पानी संरक्षित रहता था। बाद में पुल बनने के बाद वह व्यवस्था समाप्त हो गई और पानी रोकने का कोई प्रबंध नहीं किया गया। इसके कारण झील का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर पहुंच गया।
उन्होंने कहा कि पहले यहां से निकलने वाली नहरों के माध्यम से लेहड़ा और फुलमनहा क्षेत्र तक सिंचाई होती थी। साथ ही हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर यहां भव्य नहान उत्सव आयोजित होता था, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आकर स्नान करते थे। इससे इस स्थान की धार्मिक पहचान भी बनी हुई थी।
वहीं सामाजिक कार्यकर्ता पप्पू यादव ने बताया कि झील के पास स्थित प्राचीन मंदिर भी अब जर्जर हालत में पहुंच चुका है। उनका कहना है कि यह मंदिर कई पीढ़ियों पुराना है और गांव के लोगों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने सरकार से मंदिर के जीर्णोद्धार और झील के विकास की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब झील में पानी भरा रहता था, तब यहां मत्स्य पालन का ठेका लाखों रुपये में होता था, जिससे सरकार को भी राजस्व मिलता था और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता था। लेकिन अब झील और नहरों के बंद होने से खेती पर भी असर पड़ रहा है और जमीन बंजर होती जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार द्वारा विकास के कई कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन श्रीनगर झील का विकास अब तक नहीं हो पाया है। लोगों ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी से उम्मीद जताई है कि वे इस ऐतिहासिक झील के सुंदरीकरण, बैराज निर्माण, नहरों की सफाई और पर्यटन विकास के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि झील का पुनर्विकास किया जाता है तो यह क्षेत्र सिंचाई, पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से फिर से समृद्ध हो सकता है, जिससे सरकार को राजस्व और ग्रामीणों को रोजगार दोनों मिलेंगे।