नेपाल के सांप्रदायिक दंगों में पाकिस्तानी कनेक्सन, भारतीय सीमा पर ISI की बड़ी साजिश बेनकाब

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

काठमांडू! नेपाल के सुनसरी जिले में 26 जुलाई को हुए सांप्रदायिक दंगों में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की संलिप्तता के सबूत सामने आए हैं। इस दंगे को पाकिस्तान से आए एक कट्टरपंथी मौलाना ने भड़काया था। इसकी पुष्टि नेपाल की खुफिया एजेंसियों ने भी किया है। नेपाल की मुख्य खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग ने गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें विदेशी मौलानाओं की गतिविधियों और सीमावर्ती इलाकों में संभावित नेटवर्क की जांच की सिफारिश की है।

 

 

नेपाल में एक्टिव पाकिस्तानी मौलाना

नेपाल की खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तानी मूल के मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान और काठमांडू की एक मस्जिद के इमाम मुफ्ती अबू बकर कासमी की संलिप्तता का दावा किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ विदेशी धार्मिक लोगों ने भारत की सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों का दौरा किया था। हालांकि, इनकी मौजूदगी और वहां हुई हिंसा के संबंधों को नहीं जोड़ा गया है।

 

 

नेपाल में क्यों शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा?

दरअसल, 26 जुलाई को सुनसरी के देवगंज ग्रामीण नगरपालिका के अंतर्गत आने वाले कप्तानगंज में कावड़ यात्रा के दौरान धार्मिक झंडे लगाने और तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर दो समुदायों में विवाद शुरू हुआ, जो बाद में सांप्रदायिक हिंसा में बदल गया। इस दौरान हिंसा को खत्म करने के लिए नेपाल पुलिस ने फायरिंग भी की थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि कई अन्य हताहत हुए थे। बाद में सुनसरी से शुरू हुए इस सांप्रदायिक हिंसा ने नेपाल के मधेश व कोशी प्रांत के कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया था।

नेपाली पीएम बालेन शाह को करनी पड़ी अपील

हालात को काबू करने के लिए कई शहरों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को तैनात किया गया। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने शांति की अपील की। गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और हिंदू संगठनों के साथ 13 सूत्रीय समझौता किया। उन्होंने नेपाल में स्थित मदरसों की जांच के भी आदेश दिए हैं। ऐसा दावा है कि भारत नेपाल सीमा पर मदरसों की संख्या अचानक बढ़ी है।

 

 

भारत-नेपाल सीमा पर ISI सक्रिय

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई लंबे समय से भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय रही है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आईएसआई ने इस इलाके की डेमोग्राफी को बदलने की कोशिश की है।

सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर मस्जिदों और मदरसों का निर्माण किया गया है। ऐसी भी रिपोर्ट हैं कि इन मस्जिदों और मदरसों का इस्तेमाल भारत में गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता है। 

 

 

सुनसरी हिंसा के बाद नेपाल सरकार ने जांच के लिए समिति बनाई है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। 31 जुलाई तक हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई थी। ऐसे में ISI की कथित भूमिका और विदेशी नेटवर्क से जुड़े दावों की असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

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