उमेश चन्द्र त्रिपाठी
लखनऊ! राधेश्याम चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के अटल सभागार में आयोजित स्मरण उत्सव में राष्ट्रगीत के गौरव, उसके ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका पर अपने विचार रखने का अवसर मिला।
वन्दे मातरम् ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति, त्याग और संघर्ष की भावना को जागृत किया। यह केवल शब्दों का गीत नहीं, बल्कि उस राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष था जिसने भारत की स्वतंत्रता की आकांक्षा को जन-जन की शक्ति बनाया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि चैतन्य स्वरूप भारत माता है। वन्दे मातरम् इसी भाव का प्रकटीकरण है। इसलिए इसके इतिहास, भाव और राष्ट्रीय महत्व को समझना तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।
उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं मेरठ के प्रभारी मंत्री श्री असीम अरुण जी सहित अन्य गणमान्यजनों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

आज आवश्यकता है कि हम “वन्दे मातरम्” को केवल एक ऐतिहासिक स्मृति के रूप में न देखें, बल्कि उसके भीतर निहित राष्ट्रभक्ति, एकता, त्याग और भारत के प्रति कर्तव्य बोध को अपने जीवन में उतारें।

श्री मिश्र ने कहा भारत का शीर्ष नेतृत्व दुनिया के सामने भारत माता का ऐसा चित्रण प्रस्तुत करना चाहता है कि पूरी दुनिया भारत मां के सामने नतमस्तक हो, वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर केंद्र सरकार ने कानून बनाकर वंदे मातरम् को पूर्ण रूप से – लागू करने और राष्ट्रगीत का अपमान करने पर सजा का प्रावधान किया है।








