मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज। विकास खंड नौतनवा की ग्राम पंचायत मंगलापुर में फेयर बिल्डिंग मैटेरियल्स एंड हार्डवेयर फर्म से जुड़ा मामला अब जांच के घेरे में आ गया है। ग्राम पंचायत में फर्म द्वारा निर्माण सामग्री, हार्डवेयर एवं सैनिटरी सामान की आपूर्ति किए जाने के दावों के बीच मौके पर फर्म का कोई स्पष्ट कार्यालय या गोदाम नहीं मिलने की बात सामने आई है। मामले में खंड विकास अधिकारी नौतनवा की ओर से जांच आख्या आगे कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
दस्तावेज के अनुसार, शिकायत के क्रम में 18 जुलाई 2026 को गठित त्रिस्तरीय टीम ने ग्राम पंचायत मंगलापुर में स्थलीय सत्यापन किया। जांच के दौरान शिकायतकर्ता सहित ग्रामीण मौजूद रहे। टीम को मौके पर फर्म का कोई कार्यालय अथवा दुकान नहीं मिली। केवल ग्राम पंचायत की सड़क के किनारे बगीचे के पास फर्म का एक बोर्ड लगा हुआ पाया गया, लेकिन वहां फर्म से संबंधित कोई सामग्री उपलब्ध नहीं मिली।
जांच के दौरान ग्रामीणों से पूछताछ में यह बात सामने आने की बात आख्या में दर्ज है कि उक्त फर्म द्वारा ग्राम पंचायत मंगलापुर में बिल्डिंग मैटेरियल्स, हार्डवेयर एवं सैनिटरी सामान की आपूर्ति की गई है। साथ ही फर्म द्वारा ग्राम पंचायत को डीजल की आपूर्ति किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, मौके पर फर्म का गोदाम अथवा दुकान नहीं पाए जाने को लेकर जांच टीम ने फर्म की वास्तविक स्थिति का सत्यापन आवश्यक माना है।
आख्या में यह भी कहा गया है कि वर्तमान स्थिति में फर्म का कोई गोदाम या दुकान न होने के कारण फर्म की स्थिति संदिग्ध प्रतीत होती है। ऐसे में जीएसटीओ/संबंधित विभाग से फर्म की जांच कराया जाना आवश्यक बताया गया है, ताकि फर्म के पंजीकरण, वास्तविक संचालन, बिलिंग और आपूर्ति से जुड़े तथ्यों की पुष्टि हो सके।
मामले को लेकर हरिशंकर ने जिलाधिकारी पर भरोसा जताते हुए निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की उम्मीद व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि ग्राम पंचायत में किसी फर्म के माध्यम से सरकारी धन से सामग्री की खरीद की गई है तो उसके दस्तावेज, बिल, भुगतान और वास्तविक आपूर्ति की जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि जिलाधिकारी पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराकर सच्चाई सामने लाएंगे और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग की जांच में फर्म का वास्तविक अस्तित्व, ग्राम पंचायत को की गई कथित आपूर्ति, बिलों और भुगतान की स्थिति तथा डीजल आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों में क्या तथ्य सामने आते हैं।

