तिब्बत से आई बाढ़ ने मचाई तबाही, विश्व हिंदू महासंघ ने जताया दुख; भारत-चीन सीमा पर मजबूत सूचना तंत्र की मांग

मनोज कुमार त्रिपाठी 

काठमांडू। उत्तरी पड़ोसी चीन के तिब्बत क्षेत्र में हिमताल फटने से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के कई जिलों में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के रास्ते नेपाल में प्रवेश करने वाली बाढ़ से रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और नवलपरासी समेत नदी किनारे बसे इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाढ़ से बस्तियों, सड़कों, पुलों, स्कूलों, विद्युत परियोजनाओं और खेती योग्य जमीन को व्यापक नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।

प्राकृतिक आपदा से हुई मानवीय और भौतिक क्षति पर विश्व हिंदू महासंघ ने गहरा दुख व्यक्त किया है। महासंघ की अध्यक्ष अस्मिता भंडारी ने मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने और लापता नागरिकों के जल्द सुरक्षित बरामद होने की कामना की।

अस्मिता भंडारी ने कहा कि सीमा से जुड़े नदी क्षेत्रों में भविष्य में ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए नेपाल और चीन के बीच एक भरोसेमंद और तत्काल सूचना तंत्र स्थापित किया जाना बेहद जरूरी है। अचानक आने वाली बाढ़ की पूर्व सूचना मिलने से संवेदनशील नदी तटीय इलाकों में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता है और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।

महासंघ ने इस संकट की घड़ी में नेपाल सरकार, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय के साथ राहत एवं बचाव अभियान को प्रभावी बनाने की अपील की है। साथ ही लोगों से नदी किनारे और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने, प्रशासन के निर्देशों का पालन करने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया गया है।

विश्व हिंदू महासंघ ने कहा कि देश पर आई इस विपदा के समय सभी नेपाली एकजुट होकर प्रभावित परिवारों की मदद के लिए आगे आएं। महासंघ ने राहत, बचाव और मानवीय सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की है।

— अस्मिता भंडारी, अध्यक्ष, विश्व हिंदू महासंघ

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