उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! कवयित्री मधुमिता शुक्ला के हत्याकांड के आरोपी पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी ने 2027 का विधानसभा चुनाव महराजगंज जिले के फरेंदा विधानसभा क्षेत्र से लड़ने का ऐलान कर दिया है।
अमर मणि त्रिपाठी करीब 20 साल बाद रविवार को पब्लिक के सामने आए और कहा की मैं 2027 में फरेंदा से और मेरा बेटा अमन मणि त्रिपाठी नौतनवां से चुनाव लड़ेगा। कोई हो इसके मुकाबले का, तो बताओ?

दरअसल रविवार को फरेंदा कस्बे के कृष्णा मैरेज हॉल में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था। अमर मणि त्रिपाठी ने इसी कार्यक्रम में लोगों से मुलाकात की।
अमरमणि ने कहा- युवाओं ने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में सरकारें बदल दीं। भारत में युवाओं के दबाव में केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

अमर मणि त्रिपाठी ने कहा- हमारा परिवार लंबे समय से जनता के बीच रहकर राजनीति करता आया है। हमारा जनता से रिश्ता केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। हम आगे भी लोगों के बीच रहेंगे और उनके सुख-दुख में साथ खड़े रहेंगे
बता दें कि बीते 2007 में यूपी में विधानसभा चुनाव हुए थे। उस समय अमर मणि त्रिपाठी को बसपा ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था लेकिन सपा ने उन्हें महराजगंज की नौतनवां सीट से प्रत्याशी बना दिया था।

अमर मणि त्रिपाठी जेल में रहते हुए चुनाव तो जीत गये लेकिन इसके कुछ ही महीनों बाद 24 अक्टूबर 2007 को देहरादून की स्पेशल कोर्ट ने मधुमिता हत्याकांड में उन्हें उम्रकैद की सजा सुना दी।
बाहुबली नेता और पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी की विधायकी आधिकारिक तौर पर साल 2012 में गई थी, जब 2007 से 2012 तक चली उत्तर प्रदेश की 15 वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हुआ था।


साल 2003 में मशहूर कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड मामले में अमर मणि त्रिपाठी को 21 सितंबर 2003 में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय वे विधायक और मंत्री थे। गिरफ्तार होने और जेल में रहने के बावजूद, उन्होंने साल 2007 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जेल के अंदर से ही समाजवादी उम्मीदवार के रूप में लड़ा और महराजगंज जिले की नौतनवां सीट से जीत हासिल की थी।
अक्टूबर 2007 में देहरादून की विशेष अदालत ने उन्हें मधुमिता हत्याकांड का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

चूंकि उस समय सुप्रीम कोर्ट का वह ऐतिहासिक नियम (लिलि थॉमस केस, 2013) लागू नहीं हुआ था जिसके तहत 2 साल से अधिक की सजा होने पर तुरंत विधायकी रद्द हो जाती है, इसलिए दोषी करार दिए जाने के बाद भी वे तकनीकी रूप से विधानसभा के सदस्य बने रहे। उनका यह विधायक कार्यकाल 2012 में विधानसभा भंग होने के साथ समाप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा।

25 अगस्त 2023 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें समय से पहले जेल से रिहा कर दिया। वर्तमान समय में वे सक्रिय राजनीति से जुड़ गए हैं।



