मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू/नेपाल। नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच अपनों की तलाश में परिवारों की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है। काठमांडू से सामने आई एक दर्दनाक तस्वीर ने इस त्रासदी की मानवीय पीड़ा को सामने ला दिया है। दिल्ली से नेपाल पहुंचे एक पिता अपनी लापता बेटी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं और नेपाल सरकार से भावुक अपील कर रहे हैं।
‘मेरी बेटी मुझे वापस लाकर दे दो… उसे ढूंढ लो’
दिल्ली से नेपाल पहुंचे अजय गुप्ता अपनी लापता बेटी की तलाश में परेशान हैं। भावुक होकर उन्होंने नेपाल सरकार से अपील की कि उनकी बेटी को किसी भी अस्पताल, सुरक्षित स्थान या अन्य संभावित जगह पर तलाशा जाए।
अजय गुप्ता के मुताबिक, उनकी बेटी 33 लोगों के एक समूह के साथ मानसरोवर यात्रा पर जा रही थी। उनके अनुसार यह करीब 60 लोगों का ग्रुप था और यात्रा डॉक्टर चितले के ग्रुप के साथ की जा रही थी।
उन्होंने बताया कि उनकी बेटी और पूरा समूह केरुंग-तिमुर क्षेत्र की ओर गया था। उनके मुताबिक समूह की आखिरी लोकेशन करीब 8:43 बजे चीन इमिग्रेशन बॉर्डर के पास ट्रेस हुई थी। इसके कुछ ही मिनट बाद, करीब 8:46 बजे, वहां अचानक बाढ़ या सैलाब जैसी स्थिति बनने की जानकारी मिली।
इसके बाद समूह से संपर्क टूट गया।
अजय गुप्ता के अनुसार, उनकी बेटी ने नेपाल में करीब दो दिन बिताए थे और तीसरे दिन केरुंग-तिमुर के लिए रवाना हुई थी। रात में तिमुर पहुंचने के बाद अगले दिन सुबह करीब 7:10 से 7:15 बजे के आसपास नेपाल इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी हुई। इसके बाद वह चीन सीमा के पास इंतजार कर रही थी।
आखिरी बातचीत और उपलब्ध लोकेशन के बाद बेटी का कोई पता नहीं चल पाया।
अपनी बेटी की तलाश में परेशान पिता ने भावुक होकर नेपाल सरकार से गुहार लगाई कि उनकी बेटी को हर संभावित जगह पर खोजा जाए। उन्होंने कहा कि अगर उनकी बेटी जीवित है तो उसे सुरक्षित खोजकर उनके पास वापस लाया जाए और अगर वह जीवित नहीं है, तो कम से कम उसका शव ही खोजकर उन्हें सौंप दिया जाए।
एक पिता की यह मार्मिक गुहार नेपाल की प्राकृतिक आपदा के बीच सामने आई उस भयावह मानवीय पीड़ा को बयां कर रही है, जहां एक परिवार अपने सबसे प्यारे सदस्य की खबर का इंतजार कर रहा है।
अजय गुप्ता की आंखों में बेटी के लौटने की उम्मीद है और जुबां पर सिर्फ एक ही गुहार—‘मेरी बेटी को ढूंढ लो।’


