लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2027 को लेकर निर्वाचन आयोग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अधिकारियों का तबादला अब आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। यह व्यवस्था मतदाता सूची के प्रारूप प्रकाशन से लेकर अंतिम सूची जारी होने तक लागू रहेगी।
12 नवंबर को जारी होगी प्रारूप मतदाता सूची
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उत्तर प्रदेश की विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची का प्रारूप 12 नवंबर 2026 को प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद मतदाताओं को सूची में नाम जुड़वाने, विवरण में संशोधन कराने और अन्य त्रुटियों के संबंध में दावे-आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा।
दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक निर्धारित की गई है। प्राप्त आवेदनों का नियमानुसार निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।

संबंधित अधिकारियों के तबादले के लिए आयोग की अनुमति जरूरी
पुनरीक्षण कार्य में लगे जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) सहित संबंधित अधिकारियों के स्थानांतरण से पहले निर्वाचन आयोग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखना है।
मतदाता अपने नाम और विवरण की करें जांच
मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित होने के बाद नागरिकों को अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच करनी चाहिए। यदि नाम छूटा है या किसी जानकारी में त्रुटि है, तो निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित आवेदन या आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण-2027 की अहम तारीखें
- 12 नवंबर 2026: प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन
- 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026: दावे और आपत्तियां
- 28 दिसंबर 2026: दावे-आपत्तियों के निस्तारण की समयसीमा
- 4 जनवरी 2027: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन


