30 अक्टूबर तक RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग, 31 अक्टूबर को राजघाट पर सत्याग्रह शुरू करने की घोषणा; संविधान, समानता और सामाजिक एकता को लेकर रखीं कई मांगें
मनोज कुमार त्रिपाठी
गोरखपुर | शाहपुर | 24 अक्टूबर 2026
गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र से संबंधित पत्र में स्वयं को ‘पूर्वांचल गांधी’ बताने वाले संपूर्णानंद मल्ल ने राष्ट्रपति महोदया को संबोधित एक विस्तृत पत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने सहित कई राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक मांगें उठाई हैं। पत्र में उन्होंने संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक समानता और हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई एकता को देश की बुनियादी ताकत बताते हुए अपनी मांगों पर कार्रवाई की अपील की है।
RSS पर प्रतिबंध की मांग, राजघाट पर सत्याग्रह का ऐलान
संपूर्णानंद मल्ल ने अपने पत्र में RSS की विचारधारा पर तीखी आपत्ति जताते हुए संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने 30 अक्टूबर तक कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की है और कहा है कि मांगें पूरी नहीं होने पर 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर दिल्ली स्थित राजघाट पर सत्याग्रह शुरू करेंगे।
उन्होंने अपने पत्र में सत्य, अहिंसा, तिरंगे और संविधान को अपने आंदोलन का आधार बताया है। साथ ही, देश में धार्मिक सद्भाव और सभी समुदायों के बीच एकता बनाए रखने पर जोर दिया है।
मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य और रेल यात्रा की मांग
पत्र में संपूर्णानंद मल्ल ने आम नागरिकों को आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से कई प्रस्ताव रखे हैं। इनमें स्नातक तक मुफ्त शिक्षा, सभी के लिए मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं, एक समान विद्यालय व्यवस्था और सामान्य मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर वंदे भारत का किराया करने की मांग शामिल है।
उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा और रेल सेवाओं पर कर समाप्त करने, निजी वाहनों पर टोल टैक्स खत्म करने तथा कृषि योग्य भूमि के समान वितरण जैसे मुद्दे भी उठाए हैं। इसके अलावा निजी स्कूलों और अस्पतालों को सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत लाने की मांग की है।
चुनाव और न्यायपालिका में बदलाव का प्रस्ताव
संपूर्णानंद मल्ल ने राजनीतिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए विधायिका और कार्यपालिका में किसी व्यक्ति के एक बार ही सदस्य बनने, चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष निर्धारित करने तथा चुनाव लड़ने से पहले दस वर्ष खेती या श्रम करने की अनिवार्यता जैसे प्रस्ताव दिए हैं।
उन्होंने उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा आयोजित करने और आरक्षण व्यवस्था लागू करने का सुझाव भी दिया है। इसके अतिरिक्त सांसदों और विधायकों की निधियों, वेतन तथा विशेषाधिकारों को समाप्त करने की मांग की है।
पत्र में प्रधानमंत्री की शक्तियों पर नियंत्रण, मंत्रिपरिषद की भूमिका मजबूत करने और राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक पदों से जुड़े निर्णयों में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने संबंधी सुझाव भी शामिल हैं।
महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक विषमता पर चिंता
अपने पत्र में उन्होंने बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई, भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध, अंधविश्वास और सामाजिक नफरत को गंभीर समस्याएं बताया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़नी चाहिए और सत्ता कुछ व्यक्तियों या परिवारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने सरकारी संपत्तियों के निजीकरण, सार्वजनिक संसाधनों के वितरण और विभिन्न धार्मिक एवं राजनीतिक संस्थाओं की संपत्तियों से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार रखे हैं।
राष्ट्रपति सहित कई संवैधानिक पदाधिकारियों को प्रतिलिपि
पत्र में राष्ट्रपति के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को भी प्रतिलिपि भेजने का उल्लेख किया गया है। संपूर्णानंद मल्ल ने इन पदाधिकारियों से संविधान, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, समानता और राष्ट्रीय एकता की रक्षा करने की अपील की है।
उन्होंने अपने पत्र के अंत में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘जय हिंद, जय भारत’ जैसे नारों के साथ अपने प्रस्तावित आंदोलन को सत्याग्रह से जोड़ते हुए अपनी मांगों पर विचार करने का आग्रह किया है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध कराए गए पत्र के आधार पर तैयार किया गया है। पत्र प्राप्त होने, संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने, मांगों पर सरकारी प्रतिक्रिया और प्रस्तावित सत्याग्रह की आधिकारिक पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की गई है। पत्र में उल्लिखित राजनीतिक आरोप और संवैधानिक प्रस्ताव लेखक के विचार हैं, स्थापित तथ्य या सरकारी निर्णय नहीं।





