नेपाल में अब तक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला
पूर्व सचिव और तीन पूर्व महानिर्देशक समेत 21 लोगों के खिलाफ मुकदमा दायर
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
काठमांडू! भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग) ने पोखरा क्षेत्रीय अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माण में हुए भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व सचिव और नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के तीन पूर्व महानिर्देशक समेत 21 लोगों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर किया है।
संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तत्कालीन सचिव केदार बहादुर अधिकारी तथा नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के तत्कालीन महानिर्देशक संजीव गौतम, राजन पोखरेल और प्रदीप अधिकारी को प्रतिवादी बनाते हुए अख्तियार ने दूसरा मुकदमा दायर किया है। उन पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा है।
हवाई अड्डा निर्माण के लिए चीनी एक्जिम बैंक की ऋण सहायता से ठेकेदार कंपनी ‘चाइना सीएएमसी इंजीनियरिंग’ के साथ समझौता करते समय ही सलाहकार नियुक्त करने के लिए 28 लाख अमेरिकी डॉलर (करों को छोड़कर) का बजट आवंटित किया गया था। लेकिन, अख्तियार की जांच से पता चला है कि उसी बजट से काम कराने के बजाय दुर्भावनापूर्ण तरीके से प्राधिकरण के अलग बजट शीर्षक से 50 करोड़ 34 लाख 40 हजार 696 रुपये की लागत अनुमान स्वीकृत करा ली गई। इस प्रकार ठेका समझौते के भीतर की राशि खर्च न करके दोहरा बजट भार डालकर सार्वजनिक संस्थान को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है।
अख्तियार के अनुसार, सलाहकार कंपनी ‘ईआरएमसी/ए-नट/स्लेट जेवी’ के साथ 42 करोड़ 89 लाख 36 हजार 700 रुपये में समझौता किया गया और अब तक 40 करोड़ 68 लाख 26 हजार 568 रुपये का भुगतान भी हो चुका है। ठेका समझौते की शर्त के विपरीत अस्वाभाविक रूप से अधिक लागत अनुमान तैयार करने, केवल राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा कराने और सलाहकार कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।
विज्ञप्ति में उल्लेख है कि इसमें मंत्रालय के तत्कालीन सचिव, प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी के बीच मिलीभगत का तथ्य सामने आया है।
इसके अलावा, यह भी पाया गया कि ठेकेदार कंपनी चाइना सीएएमसी ने सलाहकार के लिए आवंटित 28 लाख डॉलर में से केवल 10 हजार डॉलर ही परामर्श पर खर्च करने और शेष 27 लाख 90 हजार डॉलर कहीं और खर्च करने के लिए जालसाजीपूर्ण तरीके से मूल्य तालिका (प्राइस शेड्यूल) में संशोधन किया था। संशोधित तालिका में परिमाण घटने वाली वस्तुओं पर पुराना महंगा दर बनाए रखने और परिमाण बढ़ने वाली वस्तुओं पर अतिरिक्त राशि दिखाकर दोहरा मापदंड अपनाकर प्राधिकरण को ठगा गया है।
आयोग ने इस प्रकरण में शामिल कर्मचारियों, ठेकेदार कंपनी चाइना सीएएमसी और सलाहकार कंपनी के प्रतिनिधियों को भी विपक्षी बनाया है। आयोग का निष्कर्ष है कि परियोजना का कार्यान्वयन न होने की स्थिति में दुर्भावनापूर्ण ढंग से खरीद प्रक्रिया शुरू करना और स्वीकृत बजट व कार्यक्रम के बिना खरीद समझौता करना भ्रष्टाचार के स्पष्ट इरादे की पुष्टि करता है।
इस प्रकार सार्वजनिक संपत्ति के चरम दुरुपयोग और हेराफेरी का हवाला देते हुए अख्तियार ने मूलधन और जुर्माने सहित कड़ी कार्रवाई की मांग की है।