‘ऑनलाइन बुकिंग के बाद भी पर्ची क्यों?’—भाजपा नेता का सवाल, कल धरना
मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज के नौतनवा क्षेत्र में गैस वितरण व्यवस्था को लेकर हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां लोगों को घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर नेपाल में गैस की सीमित आपूर्ति के बावजूद कोई खास दिक्कत नहीं होने की बात सामने आई है। इस अंतर ने स्थानीय व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इस पूरे मामले में गैस एजेंसी और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है, बल्कि “सिस्टम की अनदेखी और मनमानी” के कारण जनता परेशान हो रही है। उनका कहना है कि जब उपभोक्ता ऑनलाइन बुकिंग कर भुगतान कर चुके हैं और उन्हें DS नंबर भी मिल चुका है, तो फिर एजेंसी पर पर्ची कटवाकर लाइन लगवाने का क्या औचित्य है।
नेता ने आरोप लगाया कि एजेंसी द्वारा “अपने-पराये” का भेदभाव किया जा रहा है और कुछ लोगों को प्राथमिकता देकर गैस दी जा रही है, जबकि आम उपभोक्ता घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में बिना गैस दिए ही डिलीवरी दिखा देने की भी शिकायत सामने आई है।
उन्होंने यह भी कहा कि गैस वितरण को लेकर कोई स्पष्ट सूचना या संपर्क व्यवस्था नहीं है। उपभोक्ताओं को यह तक नहीं पता चल पा रहा है कि उनकी बुकिंग के बाद गैस कब और कैसे मिलेगी। फोन नंबर या तो उपलब्ध नहीं हैं या उठाए नहीं जाते, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ रही है।
प्रशासन पर निशाना साधते हुए नेता ने कहा कि जिलाधिकारी द्वारा होम डिलीवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा। उन्होंने SDM नौतनवा पर भी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि एक जिम्मेदार अधिकारी होने के नाते उन्हें खुद संज्ञान लेकर व्यवस्था सुधारनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पहले प्रस्तावित धरना चैत्र रामनवमी के कारण स्थगित कर दिया गया था, अब यह धरना शुक्रवार को तहसील परिसर में किया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहारों के समय में गैस की इस अव्यवस्था ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। महिलाएं, पुरुष और व्यापारी घंटों लाइन में लगने को मजबूर हैं, जिससे रोजमर्रा का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक ठोस कदम उठाता है या फिर जनता को इसी तरह परेशानी झेलनी पड़ेगी।