मायादेवी मंदिर तक बुजुर्ग यात्रियों के लिए शटल सुविधा की मांग, रामग्राम-तिलौराकोट को प्रमोट करने पर जोर
मनोज कुमार त्रिपाठी
लुम्बिनी में श्रीलंकाई श्रद्धालुओं का आगमन लगातार बढ़ रहा है। वैश्विक स्तर पर युद्ध और तनाव के माहौल के बावजूद श्रीलंका से बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु भगवान बुद्ध के जन्मस्थल लुम्बिनी दर्शन के लिए नेपाल पहुंच रहे हैं।
लुम्बिनी विकास ट्रस्ट के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में कुल 32,287 श्रीलंकाई श्रद्धालु/पर्यटक लुम्बिनी पहुंचे। यह संख्या अन्य देशों की तुलना में तीसरे देशों के पर्यटकों में सबसे अधिक रही। वहीं, 2025 में लुम्बिनी में कुल 1,40,969 अंतरराष्ट्रीय आगंतुक दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 26 प्रतिशत अधिक थे।

स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि श्रीलंकाई यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार और प्रशासन को सुविधाएं और बेहतर करनी चाहिए। विशेषकर बस पार्क (गेट नंबर 3) से मायादेवी मंदिर तक लगभग 1 किलोमीटर की दूरी होने के कारण बुजुर्ग श्रद्धालुओं को काफी कठिनाई होती है। श्रीलंकाई यात्रियों में बड़ी संख्या 70 से 90 वर्ष के वृद्ध श्रद्धालुओं की होती है, जिन्हें पैदल चलने में परेशानी होती है। ऐसे में शटल सेवा, ई-रिक्शा सुविधा या विशेष परिवहन व्यवस्था की मांग तेज हो गई है।
इसके साथ ही पर्यटन विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि लुम्बिनी के साथ-साथ तिलौराकोट और रामग्राम स्तूप को भी धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में प्रमोट किया जाना चाहिए। रामग्राम स्तूप को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल माना जाता है, जहां अभी टिकट की कोई व्यवस्था नहीं है और श्रद्धालुओं को शांति और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लुम्बिनी के साथ रामग्राम और तिलौराकोट जैसे स्थलों को भी प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए, तो नेपाल का धार्मिक पर्यटन और अधिक मजबूत होगा और देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।