राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष व नेपाल के पूर्व गृहमंत्री रवि लामिछाने के मंत्रिमंडल में शामिल होने पर लग सकता है ग्रहण
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
काठमांडू! नेपाल अब बालेन शाह के हवाले है। नेपाली जनता ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी पर भरोसा जताया है। मात्र चार साल पूर्व अस्तित्व में आई पूर्व पत्रकार रवि लामिछाने की इस पार्टी में काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह और जेन जी आंदोलन के प्रमुख नायक सुदन गुरूंग के शामिल होने से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ।
फिलहाल अभी यह तय कर पाना मुश्किल है कि आखिर इस पार्टी की विचारधारा क्या है और अपने किस पड़ोसी देश से इसके कैसे संबंध होंगे। इस अनिश्चितता के बीच भारत को बालेन शाह सरकार पर काफी भरोसा है और यह भी कि दोनों देशों के बीच रिश्ते और मधुर तथा प्रगाढ़ होंगे।
बालेन शाह सरकार में मंत्रियों के नामों पर अभी सिर्फ कयासबाजी है, मंत्रियों के नाम बेहद गोपनीय रखे गए हैं। इस बीच काठमांडू के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि ललितपुर के नख्खू जेल के जेलर के एक खुलासे की वजह से पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने के मंत्रिमंडल में शामिल होने पर ग्रहण लग सकता है।
गुरुवार को नख्खू कारागार के जेलर सत्यराम जोशी ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि जेन-जी आंदोलन
के दौरान उन्हें जबरन एक पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया था तथा जान से मारने की धमकी दी गई थी। पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने एक प्रकरण में इसी जेल में बंद थे। हजारों प्रदर्शनकारी रवि लामिछाने को रिहा करो के नारे लगाते हुए कारागार के मुख्य गेट पर इकट्ठा हो गए और पत्थरबाजी और तोड़फोड़ करते हुए जेल परिसर पर हमला शुरू कर दिया। भीड़ रवि लामिछाने को कारागार से बाहर ले गई।
जेन-जी आंदोलन के समय रवि लामिछाने जेल से बाहर आए थे लेकिन आंदोलन समाप्त होते ही चले भी गए थे। फिलहाल जेलर सत्यराम जोशी के इस बयान के बाद सरकार गठन के पूर्व नेपाल की राजनीति में भूचाल आ गया है और पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग तेज हो गई।