आवागमन पर प्रतिबंध के बाद बदले तस्करी के रास्ते, त्रिवेणी से बिहार तक नदी मार्ग के इस्तेमाल का आरोप

सुस्ता में निगरानी बढ़ने के बाद विनयी-त्रिवेणी क्षेत्र को वैकल्पिक मार्ग बनाने का दावा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

नवलपरासी! पश्चिमी नवलपरासी के सुस्ता क्षेत्र में नारायणी नदी के रास्ते निगरानी बढ़ाए जाने के बाद अवैध रूप से भारत भेजे जाने वाले सामानों की तस्करी के लिए वैकल्पिक मार्ग इस्तेमाल किए जाने का दावा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, अब गंडकी प्रदेश के पूर्वी नवलपरासी स्थित विनयी-त्रिवेणी क्षेत्र से नारायणी नदी के रास्ते बिहार की ओर सामान भेजे जाने की गतिविधियां बढ़ी हैं।

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि रात के समय त्रिवेणी गंडक क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से से चाइनीज लहसुन, खजूर व अन्य बीजों समेत विभिन्न सामानों को नाव के जरिए नदी पार कर भारत की ओर भेजा जाता है। 

बताया जाता है कि सामान को पहले वाहनों से नदी किनारे तक पहुंचाया जाता है और फिर नावों में लादकर बिहार के लवकुश घाट की ओर भेजे जाने का आरोप है।

एक व्यापारी ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर दावा किया कि लवकुश घाट पहुंचने के बाद माल को भारतीय वाहनों के जरिए अलग-अलग स्थानों तक भेजा जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

कुछ सप्ताह पहले सुस्ता क्षेत्र में नारायणी नदी के रास्ते नाव से सामान भारत ले जाने का कथित वीडियो सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान इस गतिविधि की ओर गया था। इसके बाद सुस्ता क्षेत्र में निगरानी बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है। 

सूत्रों के मुताबिक, निगरानी कड़ी होने के बाद तस्करी में शामिल गिरोहों ने कथित तौर पर वैकल्पिक नदी मार्ग की तलाश शुरू की और विनयी-त्रिवेणी क्षेत्र का इस्तेमाल किए जाने लगा।

नदी मार्ग की निगरानी बनी चुनौती

पश्चिमी नवलपरासी से पूर्वी नवलपरासी होते हुए नारायणी नदी के रास्ते भारत की ओर सामान भेजे जाने के दावों ने सीमा सुरक्षा और नदी क्षेत्र की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष रूप से नदी किनारे सामान पहुंचाने, नावों में लोड करने और भारतीय घाटों पर उतारने वाले संभावित स्थानों पर निगरानी को लेकर गंभीरता से जांच की जरूरत बताई जा रही है।

सूत्रों का यह भी दावा है कि कुछ लोग कथित तौर पर इस तरह की गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जमीनी सीमा पर पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और सीमा शुल्क विभाग की निगरानी के बीच अब नदी मार्गों पर भी समान स्तर की निगरानी सुनिश्चित करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। यदि नदी के रास्ते अवैध कारोबार के नए रूट सक्रिय हो रहे हैं, तो संभावित लोडिंग प्वाइंट, नदी किनारे पहुंचने वाले वाहनों और नावों की गतिविधियों की निगरानी बढ़ाना आवश्यक हो सकता है।

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