सभी को जोड़ने का रखते हैं माद्दा
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक से शुरू होकर देश के बड़े राज्यों के राज्यपाल पद तक फैला हुआ है।
प्रारंभिक जीवन और संघ से जुड़ाव
कलराज मिश्र का जन्म 1 जुलाई 1941 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के मलिकपुर (सैदपुर) गांव में हुआ था।
उन्होंने वाराणसी के काशी विद्यापीठ से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की।
वर्ष 1963 में वे गोरखपुर में संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने और राजनीति में कदम रखा।
उन्होंने जनसंघ और भाजयुमो (भारतीय जनता युवा मोर्चा) में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया तथा भाजयुमो के पहले निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
संसदीय और सांगठनिक सफर
वर्ष 1978 में वे सबसे कम उम्र के सदस्यों में से एक के रूप में पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए। अपने राजनीतिक जीवन में वे तीन बार राज्यसभा और एक बार उत्तर प्रदेश विधान
परिषद के सदस्य रहे।
उत्तर प्रदेश में भाजपा को मजबूत करने में उनकी बड़ी भूमिका रही और वे दो बार (अलग-अलग अवधियों में) प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे। उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक समय सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जाना गया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD), चिकित्सा शिक्षा और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया।
वर्ष 2012 में उन्होंने लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट से पहली बार प्रत्यक्ष विधानसभा चुनाव
लड़ा और जीत दर्ज की।
केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल का कार्यकाल
वर्ष 2014 के आम चुनावों में वे देवरिया लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय का केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने 2014 से 2017 तक सेवा दी।
जुलाई 2019 में उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
इसके बाद सितंबर 2019 से जुलाई 2024 तक उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
भारतीय राजनीति में कलराज मिश्र को एक शालीन, मृदुभाषी और सांगठनिक निष्ठा वाले नेता के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है।





