ढोल-नगाड़ों के बीच मां के दर्शन को पहुंचे भक्त, सजा नवरात्र मेला; महंत ओम प्रकाश पाण्डेय ने बताई मंदिर की प्राचीन मान्यताएं
दिलीप त्रिपाठी
फरेंदा (महराजगंज)। शारदीय नवरात्र के पहले दिन फरेंदा स्थित प्रसिद्ध मां लेहड़ा देवी शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शनिवार देर रात से ही मंदिर परिसर मां के जयकारों और भक्ति गीतों से गूंजने लगा। ढोल-नगाड़ों के बीच पहुंचे श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। महराजगंज के अलावा आसपास के जिलों तथा पड़ोसी देश नेपाल से भी भक्त मां के दरबार में पहुंचे।

नवरात्र को लेकर मंदिर परिसर और आसपास मेले जैसा माहौल रहा। प्रसाद, पूजा सामग्री, खिलौने और खानपान की दुकानें सजी रहीं। दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने मेले में खरीदारी की। बच्चों और महिलाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला।
पांच मंगलवार दर्शन करने की मान्यता
मंदिर के महंत ओम प्रकाश पाण्डेय ने बताया कि मां लेहड़ा देवी के दरबार में वर्षभर श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, लेकिन नवरात्र के दौरान विशेष भीड़ उमड़ती है। उन्होंने कहा कि श्रद्धापूर्वक मां का नमन, पूजन, कीर्तन और सेवा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। महंत के अनुसार, जो श्रद्धालु लगातार पांच मंगलवार मां के चरणों में माथा टेकते हैं, उनकी मनोकामनाएं मां पूरी करती हैं।

पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी है मान्यता
महंत ओम प्रकाश पाण्डेय ने मंदिर की प्राचीनता का उल्लेख करते हुए बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में पांचों पांडव यहां आए थे और मां भगवती की आराधना की थी। मान्यता है कि मां ने उन्हें अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित कर महाभारत के युद्ध में विजय का आशीर्वाद दिया था। उन्होंने सप्त ऋषियों के भी यहां आने और मां की मूर्ति की स्थापना कर पूजन करने की परंपरा का उल्लेख किया।


स्थानीय लोकश्रुति के अनुसार, प्राचीन काल में मंदिर के आसपास का क्षेत्र घने जंगलों से घिरा था, जिसे आद्रवन कहा जाता था। हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
व्यवस्थाओं पर रहती है श्रद्धालुओं की नजर
नवरात्र के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा, कतार प्रबंधन, पेयजल, साफ-सफाई और यातायात व्यवस्था महत्वपूर्ण रहती है। मां लेहड़ा देवी शक्तिपीठ में उमड़ रही आस्था के बीच श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
