ऐसे बलिदानियों को देश कभी भुला नहीं सकता – वीरेंद्र चौधरी विधायक फरेंदा
13 अप्रैल 1919 को हुआ था जलियांवाला बाग हत्याकांड- डॉ राम नारायण चौरसिया
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ राम नारायण चौरसिया ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 भारतीय इतिहास का एक अत्यंत पीड़ादायक दिन है, जब जलियांवाला बाग हत्याकांड अमृतसर में घटित हुआ। बैसाखी के दिन हजारों लोग रौलट एक्ट के विरोध में जलियांवाला बाग में एकत्रित हुए थे। यह स्थान चारों ओर से घिरा हुआ था और बाहर निकलने के सीमित रास्ते थे।

इसी दौरान ब्रिटिश अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड डायर सैनिकों के साथ वहां पहुंचा और बिना किसी पूर्व चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। लगभग 10 मिनट तक चली इस अंधाधुंध फायरिंग में सैकड़ों लोग मौके पर ही मारे गए और हजारों घायल हुए।
इस घटना की जांच के लिए ब्रिटिश सरकार ने हंटर आयोग का गठन किया, जिसकी रिपोर्ट में 379 लोगों की मृत्यु की पुष्टि की गई, जबकि भारतीय स्रोतों के अनुसार मृतकों की संख्या 1000 से अधिक मानी जाती है।
इस अमानवीय घटना से आहत होकर रवींद्रनाथ टैगोर ने 1919 में अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि लौटा दी। वहीं महात्मा गांधी ने इस घटना के बाद ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन को और तेज किया।

इस हत्याकांड का बदला लेने के लिए क्रांतिकारी उधम सिंह ने 1940 में लंदन के कैक्सटन हॉल में पंजाब के तत्कालीन पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर की हत्या कर शहीदों के प्रति अपना संकल्प पूरा किया।
आज भी यह घटना हमें स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों और ब्रिटिश शासन की क्रूरता की याद दिलाती है।
इस अवसर पर फरेंदा के लोकप्रिय विधायक माननीय वीरेंद्र चौधरी एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजय सिंह जी ने जलियांवाला बाग हत्याकांड के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को नमन किया और कहा कि ऐसे बलिदानियों को देश कभी भुला नहीं सकता।

