कुशीनगर में कथित नेटवर्क मार्केटिंग सिंडिकेट पर बड़ा शिकंजा, मानवाधिकार हनन और बंधक बनाकर रखने के आरोपों की भी जांच शुरू
मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली/कुशीनगर।
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े कुशीनगर जनपद में संचालित कथित चेन मार्केटिंग और ऑनलाइन ठगी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 453 नेपाली नागरिकों को नेपाल पुलिस के हवाले कर दिया। यह कार्रवाई नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास को मिली गंभीर शिकायतों के बाद की गई, जिसमें नेपाली युवक-युवतियों को नौकरी और बेहतर आय का लालच देकर कथित ठगी के नेटवर्क में फंसाने तथा कुछ लोगों को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने के आरोप लगाए गए थे।
शनिवार दोपहर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत 11 वाहनों में सवार 453 नेपाली नागरिकों को कुशीनगर से सोनौली अंतरराष्ट्रीय सीमा लाया गया, जहां भारतीय अधिकारियों ने उन्हें नेपाल पुलिस को सौंप दिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।
जानकारी के अनुसार, नेपाल दूतावास को प्राप्त शिकायत में कहा गया था कि बड़ी संख्या में नेपाली नागरिकों को नेटवर्क मार्केटिंग और ऑनलाइन ठगी से जुड़ी गतिविधियों में जबरन शामिल किया जा रहा है। आरोप यह भी था कि कई लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया गया और उन्हें स्वतंत्र रूप से आने-जाने तक की अनुमति नहीं थी।
दूतावास ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की थी। इसके बाद कुशीनगर पुलिस ने जांच शुरू की और कथित नेटवर्क से जुड़े नेपाली नागरिकों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रूप से सीमा तक पहुंचाने की कार्रवाई की।
बताया जा रहा है कि कसया थाना क्षेत्र में लंबे समय से नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर बेरोजगार युवाओं को आकर्षक नौकरी, ऊंची कमाई और आर्थिक स्वतंत्रता के सपने दिखाकर जोड़ा जा रहा था। कई लोगों से मोटी रकम निवेश कराई गई, लेकिन बाद में उन्हें न तो वादा किया गया लाभ मिला और न ही उनकी जमा पूंजी वापस हुई। इससे नाराज पीड़ितों ने पुलिस और नेपाल दूतावास से शिकायत की थी।
सोनौली कोतवाली प्रभारी महेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि सभी 453 नेपाली नागरिकों को विधिवत प्रक्रिया पूरी करने के बाद नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया है। वहीं, रुपन्देही के पुलिस अधीक्षक जनक बहादुर शाही ने कहा कि नेपाल पहुंचने के बाद सभी व्यक्तियों की पहचान और भूमिका की जांच की जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि कौन लोग वास्तव में ठगी के शिकार हैं और कौन कथित नेटवर्क मार्केटिंग गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सीमा पार नेटवर्क पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्रों में संचालित संदिग्ध नेटवर्क मार्केटिंग और ऑनलाइन ठगी गिरोहों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेरोजगारी और जल्दी अमीर बनने की चाहत का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह युवाओं को अपने जाल में फंसाते हैं। अब दोनों देशों की एजेंसियों की नजर इस नेटवर्क के संचालकों और इसके आर्थिक स्रोतों पर टिकी हुई है।
बड़ा सवाल
453 नेपाली नागरिकों का एक साथ इस तरह सीमा तक पहुंचाया जाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि सीमा पार फैले कथित ठगी नेटवर्क की गहराई और उसके प्रभाव का संकेत भी माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें नेपाल और भारत की जांच एजेंसियों पर हैं कि इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक कब और कैसे पहुंचा जाता है।