मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू, नेपाल। नागरिक बचाव महाअभियान द्वारा आयोजित एक विशाल पत्रकार सम्मेलन में अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष एवं प्रस्तावित नई राजनीतिक पार्टी के सर्वोच्च नेता दुर्गा प्रसाईं ने नेपाल की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था, सरकार और कई राष्ट्रीय मुद्दों पर तीखा हमला बोला। अपने लंबे संबोधन में उन्होंने हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना, राजसंस्था की वापसी, नई राजनीतिक पार्टी के गठन और व्यापक जनआंदोलन की घोषणा करते हुए कई बड़े दावे और आरोप लगाए।

कार्यक्रम की शुरुआत विभिन्न केंद्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश संयोजकों और अभियान से जुड़े नेताओं के स्वागत से हुई। इसी दौरान मंच से “द इंडिया एक्सप्रेस” के प्रधान संपादक श्रद्धेय मनोज कुमार त्रिपाठी का विशेष रूप से स्वागत किया गया। आयोजकों ने कहा कि “द इंडिया एक्सप्रेस” आम नागरिकों की आवाज़ को बुलंद करने और देश में व्याप्त विकृतियों, विसंगतियों, अन्याय, अत्याचार तथा कुशासन के खिलाफ मीडिया के माध्यम से निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मनोज कुमार त्रिपाठी का जोरदार तालियों के साथ सम्मान किया गया।
अपने संबोधन में दुर्गा प्रसाईं ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही वर्तमान सत्ता के भविष्य को लेकर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि आज नेपाल में गरीब, व्यापारी, उद्योगपति, सहकारी पीड़ित, लघुवित्त पीड़ित, भूमिहीन और बैंक के कर्जदार—सभी परेशान हैं, जबकि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है।

प्रसाईं ने कहा कि उनकी लड़ाई सत्ता पाने की नहीं बल्कि “नेपाल, धर्म और गरीब जनता को बचाने की लड़ाई” है। उन्होंने दावा किया कि उनके आंदोलनों के कारण बैंकों की ब्याज दरों और लघुवित्त से जुड़े मुद्दों पर सरकार को कदम उठाने पड़े।
अपने भाषण में उन्होंने हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना को नेपाल की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जब तक नेपाल में किराँत, बौद्ध सहित वैदिक सनातन हिंदू अधिराज्य स्थापित नहीं होता, तब तक देश की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो देशव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा।
दुर्गा प्रसाईं ने घोषणा की कि जल्द ही उनकी अगुवाई में एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन किया जाएगा और उसका नेतृत्व वे स्वयं करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वे आंदोलन के लिए किसी भी बलिदान से पीछे नहीं हटेंगे।

प्रेस वार्ता के दौरान प्रसाईं ने सरकार, गृह मंत्रालय, विभिन्न राजनीतिक दलों और कई राष्ट्रीय घटनाओं को लेकर अनेक गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने धार्मिक तनाव, रोहिंग्या शरणार्थियों, विदेशी हस्तक्षेप, नेपाल की सुरक्षा व्यवस्था तथा वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व को लेकर कई दावे किए। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने अपने स्तर पर दावे पेश किए ।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए प्रसाईं ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी एक धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि वर्तमान व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने दोहराया कि आने वाले समय में व्यवस्था परिवर्तन के लिए व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने भूमिहीन, लघुवित्त पीड़ित, सहकारी पीड़ित, व्यापारी, व्यवसायी, निर्माण व्यवसायियों और आम नागरिकों से आंदोलन में साथ देने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।