पुलिस बुलाकर प्रशासनिक भवन से बाहर निकाले जाने का आरोप, व्यापार मंडल खुलकर आया समर्थन में
मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली/बेलहिया। भारत-नेपाल सीमा स्थित बेलहिया भंसार (कस्टम) कार्यालय में प्रशासनिक भवन में प्रवेश को लेकर भारतीय कस्टम एजेंटों और नेपाल भंसार प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पिछले चार दिनों से भारतीय एजेंट धरने पर बैठे हैं और पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
धरनारत भारतीय एजेंटों का आरोप है कि उन्हें नेपाल भंसार के प्रशासनिक भवन में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा। उनका कहना है कि उनकी यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने नेपाल भंसार प्रमुख से मुलाकात कर वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को बहाल करने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया।

भारतीय एजेंटों का दावा है कि नेपाल भंसार प्रमुख सार्वजनिक रूप से यह कहते हैं कि किसी भी एजेंट के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है, लेकिन व्यवहार में भारतीय एजेंटों को प्रशासनिक भवन में प्रवेश नहीं मिल रहा है। एजेंटों के अनुसार, कार्यालय में प्रवेश के लिए विजिटिंग कार्ड की व्यवस्था है, लेकिन यह सुविधा एजेंटों के लिए नहीं बल्कि अन्य आगंतुकों के लिए है।
आंदोलन कर रहे एजेंटों ने आरोप लगाया कि जब करीब 20 से 25 भारतीय एजेंट अपनी बात रखने के लिए भंसार कार्यालय पहुंचे तो पुलिस और सुरक्षा बल बुला लिए गए। उनका कहना है कि इसके बाद सभी भारतीय एजेंटों को प्रशासनिक भवन से बाहर कर दिया गया। एजेंटों के अनुसार, यदि बातचीत करनी थी तो पुलिस बुलाने की आवश्यकता नहीं थी। इसी घटना के बाद उन्होंने प्रशासनिक भवन में न जाने और कलमबंद हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया।

भारतीय एजेंटों का कहना है कि भारत-नेपाल सीमा पर होने वाले अधिकांश आयात-निर्यात संबंधी कार्य वर्षों से भारतीय एजेंट करते आए हैं। उनका दावा है कि यदि भारतीय एजेंटों को व्यवस्था से अलग किया गया तो व्यापारिक प्रक्रियाएं प्रभावित होंगी और सीमा पार कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। एजेंटों ने आरोप लगाया कि उन्हें व्यवस्थित रूप से कामकाज से बाहर करने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच ग्राम उद्योग व्यापार मंडल ने भी भारतीय एजेंटों के आंदोलन को खुला समर्थन दिया है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय एजेंटों के साथ कथित दुर्व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के दशकों पुराने व्यापारिक और सामाजिक संबंधों को देखते हुए भारतीय एजेंटों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि आवश्यकता पड़ी तो पूरे जिले का व्यापारी समाज भी आंदोलन में शामिल होगा।



वहीं, नेपाल भंसार प्रमुख हरिहर पौडेल ने भारतीय एजेंटों के आरोपों से अलग पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी ओर से किसी भी अधिकृत एजेंट के प्रशासनिक भवन में प्रवेश पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। उनके अनुसार, निर्धारित प्रक्रिया के तहत कोई भी व्यक्ति कार्यालय में आकर अपना कार्य कर सकता है।
हालांकि, भारतीय एजेंटों का कहना है कि नेपाल भंसार एजेंट संघ की ओर से केवल सीमित संख्या में लोगों के प्रवेश की बात कही जा रही है, जबकि व्यवहार में भारतीय एजेंटों को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। इसी विरोधाभास को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
फिलहाल भारतीय एजेंट अपनी पुरानी व्यवस्था बहाल करने, प्रशासनिक भवन में निर्बाध प्रवेश सुनिश्चित करने और उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना और कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी। दूसरी ओर, नेपाल भंसार प्रशासन का कहना है कि उसकी ओर से किसी प्रकार की रोक नहीं है। अब इस विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों के संबंधित अधिकारियों के हस्तक्षेप का इंतजार किया जा रहा है।