11 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर, राजसंस्था समर्थक और राष्ट्रवादी शक्तियों को एक मंच पर लाने की पहल
मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू/नेपाल।
नेपाल की राजनीति में एक नए राजनीतिक समीकरण का संकेत देते हुए डॉ. धवल शमशेर राणा और दुर्गा प्रसाईं ने 11 सूत्रीय सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर नई राजनीतिक शक्ति निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। शुक्रवार को हुए इस समझौते ने राष्ट्रवादी और राजसंस्था समर्थक विचारधाराओं को एकजुट करने के साथ-साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ सशक्त अभियान चलाने तथा देश को नया राजनीतिक विकल्प देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।

समझौता कार्यक्रम में बोलते हुए दुर्गा प्रसाईं ने डॉ. धवल शमशेर राणा को अपने अभिभावक समान बताते हुए कहा कि उनके बीच किसी प्रकार की भागीदारी, पद या व्यक्तिगत स्वार्थ की राजनीति नहीं है। उन्होंने देशहित में साझा यात्रा की आवश्यकता पर बल देते हुए अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भी राणा को समान सम्मान और नेतृत्व स्वीकार करने की अपील की।
समझौते के साथ ही प्रसाईं ने अपने नेतृत्व में संचालित ‘नागरिक बचाउ महाअभियान’ को औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की। वहीं डॉ. राणा ने जानकारी दी कि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद नए दल का नाम और झंडा तय किया जाएगा तथा मलमास समाप्त होने के बाद नई राजनीतिक पार्टी की औपचारिक घोषणा की जाएगी।


दोनों नेताओं ने इस समझौते को “नए राजनीतिक शक्ति केंद्र की आधारशिला” बताया है। सहमति पत्र में राष्ट्रवाद, सुशासन, भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था, राष्ट्रीय संसाधनों के संरक्षण, आर्थिक सुधार, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल पारंपरिक राजनीतिक दलों से असंतुष्ट वर्गों को आकर्षित कर नेपाल में एक नए शक्ति केंद्र का निर्माण कर सकती है। हालांकि इसकी सफलता संगठनात्मक एकता, स्पष्ट नीतियों और जनता के विश्वास पर निर्भर करेगी। यदि इन पहलुओं पर प्रभावी ढंग से काम किया गया तो यह गठजोड़ नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर सकता है।
11 सूत्रीय समझौते के प्रमुख बिंदुओं में सनातन हिंदू अधिराज्य की अवधारणा, पृथ्वीनारायण शाह के राष्ट्रवादी दर्शन, सुधारमुखी संघीय व्यवस्था, दोहरी नागरिकता की नीति, भूमिहीन एवं पीड़ित वर्गों की समस्याओं का समाधान, असंलग्न विदेश नीति, भ्रष्टाचारमुक्त शासन, स्वदेशी उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था, समान विचारधारा वाले समूहों के साथ मिलकर नई पार्टी गठन तथा 60 प्रतिशत युवा एवं महिला सहभागिता सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे शामिल हैं ।