नगर पालिका के कर्मचारी दे रहे हैं धमकी, नहीं जमा किया टैक्स तो होगी जेल!
मनोज कुमार त्रिपाठी
नौतनवा। नगर पालिका परिषद नौतनवा में जलकल और हाउस टैक्स की बकाया वसूली को लेकर नया विवाद सामने आया है। एक बातचीत के दौरान अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज से बकाया वसूली, आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी करने की प्रक्रिया और कथित भेदभावपूर्ण कार्रवाई को लेकर कई सवाल पूछे गए।
बातचीत में अधिशासी अधिकारी ने बताया कि नगर पालिका में करीब 80 से 90 बड़े बकायेदार हैं और इनमें से 20 बड़े बकायेदारों के खिलाफ आरसी जारी की गई है। उनका कहना था कि आरसी केवल बड़े बकायेदारों के विरुद्ध जारी की गई है, जबकि छोटे बकायेदारों से किस्तों में वसूली की जाती है।

हालांकि, बातचीत के दौरान मौजूद लोगों ने दावा किया कि करीब 13 हजार रुपये के बकाया पर भी एक व्यक्ति के खिलाफ आरसी जारी की गई थी और तहसील के माध्यम से वसूली की कार्रवाई हुई। इस पर अधिशासी अधिकारी ने कहा कि यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है तो वह इसकी जांच कराएंगे और संबंधित अभिलेख देखेंगे।
इसी दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि नगर पालिका के कुछ कर्मचारी लोगों को यह कहकर दबाव बनाते हैं कि उनके खिलाफ आरसी जारी हो चुकी है और यदि तत्काल बकाया जमा नहीं किया गया तो जेल जाना पड़ सकता है।
बातचीत में सत्य प्रकाश और राजन वर्मा नामक कर्मचारियों का भी उल्लेख किया गया। आरोप लगाया गया कि वे वसूली के दौरान लोगों को आरसी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस संबंध में संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सामने आया है।

अधिशासी अधिकारी संदीप कुमार सरोज ने स्पष्ट कहा कि नगर पालिका की ओर से बड़े बकायेदारों के विरुद्ध ही आरसी जारी की गई है। यदि किसी छोटे बकायेदार के मामले में आरसी जारी होने का प्रमाण प्रस्तुत किया जाता है, तो पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
नगरपालिका के कर लिपिक संदीप कुमार सरोज ने बताया कि जिन बकायेदारों पर एक लाख रुपये से कम की देनदारी होती है, उनके खिलाफ आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी नहीं की जाती। ऐसे मामलों में पहले नोटिस देकर बकाया जमा करने का अवसर दिया जाता है। वहीं, एक लाख रुपये या उससे अधिक के बड़े बकायेदारों के विरुद्ध नियमानुसार आरसी जारी कर वसूली की कार्रवाई की जाती है।
अब यह मामला नगर पालिका की वसूली प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। यदि आरोपों के समर्थन में दस्तावेज सामने आते हैं, तो प्रशासनिक स्तर पर जांच और आगे की कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।