पूर्व विधायक अमनमणि ने नौतनवा टैक्सी स्टैंड वसूली पर साधा निशाना , बोले – टैक्सी स्टैंड तो स्वयं विधायक जी वसूल रहे है

अवैध पार्किंग वसूली पर लगाया बड़ा आरोप , बोले – पैसे का बंदरबांट हो रहा है

20 लाख से अधिक पार्किंग वसूली के आरोप

अमनमणि के धरना प्रदर्शन में सूत्रीय मांगों मेसे एक मांग टैक्सी स्टैंड के नाम – अमनमणि त्रिपाठी

नौतनवा, महाराजगंज। नौतनवा नगरपालिका क्षेत्र में टैक्सी स्टैंड और पार्किंग के नाम पर होने वाली कथित वसूली को लेकर पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक बातचीत के दौरान उन्होंने टैक्सी स्टैंड के नाम पर नेपाल से आने वाले यात्रियों, निजी वाहनों और टैक्सी-टेंपो चालकों से कथित वसूली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह गलत तरीके से संचालित की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले को लेकर जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से भी कई बार शिकायत की जा चुकी है।

अमनमणि त्रिपाठी ने अपने विधायक कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय गरीब लड़के टेंपो और टैक्सी चलाते थे। कई लोग वाहन किराये पर लेकर चलाते थे तो कई लोग किस्तों पर वाहन लेकर अपना परिवार चलाते थे। उनके अनुसार उस समय टैक्सी स्टैंड के नाम पर उनसे 40 रुपये प्रति राउंड और 50 रुपये प्रति राउंड तक वसूली की जाती थी। अमनमणि ने दावा किया कि उन्होंने इस वसूली का विरोध किया और गरीब टैक्सी चालकों से टैक्सी स्टैंड का पैसा माफ कराया, जिसके बाद एक समय ऐसा आया कि कोई भी टैक्सी स्टैंड शुल्क नहीं देता था।

उन्होंने आगे कहा कि बाद में दोबारा 40 रुपये प्रतिदिन अथवा 40 रुपये प्रति चक्कर की वसूली शुरू होने लगी। अमनमणि के मुताबिक उन्होंने इस पर भी आपत्ति जताई और तत्कालीन नगरपालिका चेयरमैन गुड्डू खान से इसे बंद कराने को कहा। उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि यदि टैक्सी स्टैंड के नाम पर वसूली बंद नहीं कराई गई तो वह मामले में कानूनी कार्रवाई कराएंगे।

पूर्व विधायक ने टैक्सी स्टैंड की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नगरपालिका के पास यदि टैक्सी स्टैंड के लिए निर्धारित भूमि नहीं है तो सड़क पर टैक्सी स्टैंड के नाम पर वसूली कैसे की जा सकती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के शासनादेश यानी G.O. का हवाला देते हुए दावा किया कि बिना भूमि के सड़क पर टैक्सी स्टैंड बनाकर वसूली नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि जब नगरपालिका के पास टैक्सी स्टैंड के लिए भूमि ही नहीं है तो फिर किस आधार पर टैक्सी स्टैंड का टेंडर किया जा रहा है और वाहनों से पैसे लिए जा रहे हैं।

इसी दौरान अमनमणि त्रिपाठी ने मौजूदा विधायक पर सीधे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टैक्सी स्टैंड का ठेका भले ही किसी उपाध्याय जी के नाम पर हो, लेकिन उनके आरोप के अनुसार मौके पर वसूली का काम विधायक के रिश्तेदार हरीलालगढ़ के पांडे जी और उनके लोग करते हैं। अमनमणि ने आरोप लगाया कि कागजों पर ठेका किसी और के नाम है, जबकि वास्तविक वसूली विधायक के रिश्तेदारों के माध्यम से की जा रही है। इसी आधार पर उन्होंने बेहद तीखा आरोप लगाते हुए कहा, “टैक्सी स्टैंड तो स्वयं विधायक ही वसूल रहे हैं।”

अमनमणि ने आरोप लगाया कि इस पूरी व्यवस्था में शासन-प्रशासन तक इस तरह लगा हुआ है कि संबंधित लोगों द्वारा अधिक से अधिक पैसा कमाया जा सके। उन्होंने टैक्सी स्टैंड के टेंडर की दर और मौके पर होने वाली कथित वसूली के बीच भारी अंतर का दावा किया। उनके मुताबिक टेंडर में जहां प्रतिदिन करीब 2 हजार या 5 हजार रुपये की राशि बताई जाती है, वहीं मौके पर कथित तौर पर 50 हजार से 1 लाख रुपये प्रतिदिन तक की वसूली की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि टेंडर रेट और वास्तविक वसूली में करीब 50 गुना तक का अंतर है।

पूर्व विधायक ने कहा कि यदि इतनी बड़ी रकम वास्तव में वसूली जा रही है तो इससे नगरपालिका को भी भारी नुकसान हो रहा है। उनका कहना था कि जो पैसा नगरपालिका के हक और अधिकार का है तथा जिसका इस्तेमाल शहर के विकास के लिए होना चाहिए, वह कथित रूप से सही तरीके से नगरपालिका के विकास कार्यों में नहीं लग रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस रकम का बंदरबांट हो रहा है और विधायक, विधायक के रिश्तेदार तथा उनके करीबी लोग कथित तौर पर इस पैसे का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन पर विधायक की ओर से दबाव बनाकर कथित अवैध वसूली कराई जा रही है।

जब उनसे पूछा गया कि इस कथित वसूली से महीने में करीब पांच लाख रुपये की आय होने की बात कही जा रही है और यह पैसा कहां जा रहा है, तो अमनमणि ने इस आंकड़े को भी कम बताया। उन्होंने दावा किया कि यह आय पांच लाख रुपये नहीं बल्कि उससे कहीं अधिक है और कम से कम 20 लाख रुपये प्रतिमाह की कथित आय होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि हरलालगढ़ के पांडे जी इस रकम को एकत्रित करके विधायक तक पहुंचाते हैं। अमनमणि के अनुसार विधायक अपना हिस्सा रखने के बाद बाकी रकम का भी कथित रूप से अलग-अलग लोगों में बंदरबांट करते हैं। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में लोगों को पहले से पता है कि टैक्सी स्टैंड का पैसा कहां जाता है और किसके बीच उसका बंटवारा होता है।

अमनमणि ने इस दौरान नौतनवा नगरपालिका के ईओ संदीप कुमार सरोज को लेकर भी सवालों का जवाब दिया। बातचीत में जब यह कहा गया कि ईओ से बात करने की कोशिश करने पर वह कार्यालय से चले जाते हैं या फोन नहीं उठाते और कथित अवैध वसूली से करीब पांच लाख रुपये महीने की आय होने की बात सामने आ रही है, तो अमनमणि ने कहा कि पांच लाख नहीं बल्कि कम से कम 20 लाख रुपये की आय होने का उनका दावा है। ईओ को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक के दबाव के कारण अधिकारी डरते होंगे। उन्होंने कहा कि ईओ जिम्मेदार अधिकारी हैं और यदि वह सच बोलते हैं तो राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जबकि गलत बोलने पर वह खुद जिम्मेदार होंगे। अमनमणि ने दावा किया कि विधायक ईओ को डांट देते हैं और इसी वजह से अधिकारी दबाव में रहते हैं।

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पूर्व विधायक ने टैक्सी स्टैंड की कथित वसूली से प्राप्त धन के इस्तेमाल को लेकर भी नगरपालिका से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि यदि टैक्सी स्टैंड से नगरपालिका को पैसा मिलता है तो आखिर वह पैसा किस मद में खर्च किया गया। उन्होंने पूछा कि उस रकम से नौतनवा के किस मोहल्ले की सड़क बनाई गई, किस मोहल्ले में नाली बनाई गई और किन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट या हाईमास्ट लाइट लगाई गई। अमनमणि का कहना था कि नौतनवा के कई मोहल्लों में विकास कार्यों की जरूरत है, लेकिन उनके अनुसार बाईपास क्षेत्र में विशेष रूप से लाइटिंग की गई है।

अमनमणि ने बाईपास पर बने एक दो मंजिला मकान का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि टैक्सी स्टैंड से कथित तौर पर आने वाला पैसा इसी बाईपास स्थित आवास में लगाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि बाईपास पर आगे से पीछे तक लाइट लगी हुई है और लगभग 100 मीटर क्षेत्र में लाइटिंग की गई है, जबकि नौतनवा के अन्य मोहल्लों में इस तरह की व्यवस्था देखने को नहीं मिलती। उन्होंने सवाल उठाया कि जब शहर के दूसरे मोहल्लों में स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइट की जरूरत है तो बाईपास पर ही इतनी लाइटिंग क्यों की गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बातचीत के आधार पर नहीं हुई है।

बातचीत के दौरान पूर्व सांसद हर्षवर्धन सिंह के कार्यकाल से जुड़े एक पुराने मामले का भी संदर्भ आया। उनसे पूछा गया कि पूर्व सांसद के समय युनूस खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था और वह जेल भी गए थे, ऐसे में यदि वर्तमान में भी इस तरह की कथित वसूली हो रही है तो किस तरह की कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर अमनमणि ने अपने धरना-प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने नौतनवा में 20 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दिया था और उन मांगों में टैक्सी स्टैंड के नाम पर हो रही कथित अवैध वसूली का मुद्दा भी शामिल था।

अमनमणि ने दोहराया कि उनका मुख्य सवाल टैक्सी स्टैंड की वैधानिकता और नगरपालिका की भूमिका को लेकर है। उनका कहना है कि नगरपालिका के पास यदि टैक्सी स्टैंड के लिए जमीन नहीं है और उसके bylaws में ऐसी वसूली का प्रावधान नहीं है तो टेंडर करने और सड़क पर वसूली करने की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग उठाई कि यह सार्वजनिक किया जाए कि टैक्सी स्टैंड के नाम पर प्रतिदिन कितनी राशि वसूली जाती है, उसमें से कितनी रकम नगरपालिका को मिलती है और नगरपालिका को मिलने वाली राशि से अब तक कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए हैं।

पूर्व विधायक के इन आरोपों के बाद नौतनवा में टैक्सी स्टैंड व पार्किंग वसूली को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल कथित 20 लाख रुपये से अधिक की मासिक वसूली, टेंडर और वास्तविक वसूली के बीच कथित भारी अंतर, टैक्सी स्टैंड के लिए भूमि की उपलब्धता तथा वसूली से प्राप्त रकम के इस्तेमाल को लेकर है। यदि प्रशासन मामले की जांच कराता है तो टेंडर दस्तावेज, नगरपालिका के रिकॉर्ड, वसूली की रसीदें, बैंक खाते में जमा रकम और कराए गए विकास कार्यों के भुगतान रिकॉर्ड से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अमनमणि त्रिपाठी ने पूरे मामले में नियमों के अनुसार वसूली, कथित अवैध वसूली की जांच और नगरपालिका के राजस्व का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग उठाई है। अब देखना होगा कि नगरपालिका प्रशासन, ईओ, संबंधित ठेकेदार और मौजूदा विधायक इन गंभीर आरोपों पर क्या जवाब देते हैं। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि खबर में लगाए गए गंभीर आरोप पूर्व विधायक अमनमणि त्रिपाठी के बयान पर आधारित हैं और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।

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