‘बत्ती के नीचे अंधेरा’: करोड़ों की लागत से बने झापा नाटक घर तक पहुंचने के लिए आज भी नहीं है बेहतर सड़क

मनोज कुमार त्रिपाठी 

झापा (नेपाल)। भाषा, कला, साहित्य और पूर्वीय संस्कृति के संरक्षण एवं नई पीढ़ी तक सांस्कृतिक विरासत पहुंचाने के उद्देश्य से स्थापित क्षितिज नाट्य समूह, झापा द्वारा निर्मित झापा नाटक घर आज अपनी उपलब्धियों के बावजूद बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। लगभग 3.50 करोड़ रुपये की जनसहयोग राशि से निर्मित यह सांस्कृतिक धरोहर आज भी मात्र 500 मीटर सड़क के अभाव में उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।

रंगकर्मी एवं सांस्कृतिक अभियंता माधव कल्पित के नेतृत्व में शुरू हुई इस पहल को हजारों नागरिकों ने एक-एक ईंट, भूमि दान और आर्थिक सहयोग देकर साकार किया। वर्ष 2018 से जनसहयोग अभियान के माध्यम से निर्मित यह नाटक घर कोशी प्रदेश का पहला प्रमुख रंगमंच माना जाता है। इसके साथ ही बहुजातीय सांस्कृतिक संग्रहालय के निर्माण के लिए 145 धुर भूमि भी जुटाई जा चुकी है।

यह भवन केवल एक रंगमंच नहीं, बल्कि संस्कृति, साहित्य और शिक्षा को जोड़ने वाला जीवंत केंद्र बन चुका है। 1 पुस 2082 से फागुन माह के अंत तक लगातार 91 दिनों तक मंचित ‘मुना–मदन’ नाटक को 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने देखा, जिससे पाठ्यपुस्तक के पात्रों और साहित्य को उन्होंने पहली बार मंच पर जीवंत रूप में अनुभव किया।

हालांकि, इतनी बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धि के बावजूद स्थानीय सरकार की उपेक्षा लगातार सवाल खड़े कर रही है। बिर्तामोड–1 स्थित झापा नाटक घर तक पहुंचने के लिए केवल 500 मीटर सड़क के उन्नयन की आवश्यकता है, लेकिन वर्षों बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका है। बारिश के मौसम में कलाकारों और दर्शकों को कीचड़ से होकर नाटक घर तक पहुंचना पड़ता है, जिससे कार्यक्रमों के आयोजन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

विडंबना यह भी है कि 8 मार्च 2026 को वियतनाम सरकार ने नेपाली कला, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए माधव कल्पित के माध्यम से इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया। लेकिन जिस सांस्कृतिक संस्थान को विदेश में सम्मान मिला, उसे अपने ही स्थानीय स्तर पर मूलभूत सड़क सुविधा तक नसीब नहीं हो सकी।

सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल सड़क का मामला नहीं, बल्कि संस्कृति के प्रति सरकार की सोच और प्राथमिकताओं का प्रश्न है। उनका कहना है कि यदि करोड़ों रुपये के जनसहयोग से बने इस सांस्कृतिक केंद्र तक पहुंचने के लिए 500 मीटर सड़क भी नहीं बन पाती, तो यह स्थानीय प्रशासन की गंभीर उदासीनता को दर्शाता है।

क्षितिज नाट्य समूह और स्थानीय नागरिकों ने संबंधित वार्ड, नगरपालिका, प्रदेश तथा संघीय सरकार से मांग की है कि झापा नाटक घर तक पहुंचने वाली सड़क का शीघ्र निर्माण एवं उन्नयन कराया जाए, ताकि कला और संस्कृति के इस महत्वपूर्ण केंद्र तक आम नागरिकों और विद्यार्थियों की पहुंच आसान हो सके।

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