डीजीपी कार्यालय से 24 घंटे में वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन, पीड़ित परिवार ने पुलिस को पहले ही सूचना देने का किया दावा
मनोज कुमार त्रिपाठी
लखनऊ। राजधानी के दुबग्गा क्षेत्र में प्लॉट की बाउंड्रीवॉल को कथित तौर पर बुलडोजर से गिराए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी जमीन पर बनाई गई बाउंड्री को कुछ लोगों ने बुलडोजर लगाकर ढहा दिया। मामले में शिकायत और पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित ने दावा किया कि इस मामले में डीजीपी कार्यालय से भी संपर्क किया गया, जहां दस्तावेज और वीडियो उपलब्ध कराने के बाद 24 घंटे के भीतर वैधानिक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया गया।
2022 में रजिस्ट्री कराकर लिया था कब्जा
पीड़ित के मुताबिक, उन्होंने 19 दिसंबर 2022 को अशोक कुमार से प्लॉट की रजिस्ट्री कराई थी। उनका कहना है कि संपत्ति का पूरा भुगतान करने के बाद कब्जा भी प्राप्त कर लिया था। परिवार में बेटे की मृत्यु के बाद आर्थिक और पारिवारिक संकट के चलते वह तत्काल बाउंड्री का निर्माण नहीं करा सके। बाद में पैसे की व्यवस्था करके उन्होंने 12 और 13 तारीख को प्लॉट पर बाउंड्री बनवाने का काम शुरू कराया।


पीड़ित का दावा है कि बाउंड्री का निर्माण चल रहा था, तभी अनीश, अनस, पाकशा सहित करीब 15 से 16 लोग मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रोकने लगे। पीड़ित के अनुसार, उन्होंने इस घटना का वीडियो भी बनाया है।
खसरा संख्या को लेकर भी सामने आया विवाद
पीड़ित ने बताया कि जमीन की खसरा संख्या को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत पड़ी। उनके अनुसार, शुरुआत में खसरा संख्या 701 को लेकर जानकारी सामने आई, जबकि उनके पास खसरा संख्या 677 से संबंधित दस्तावेज और दाखिल-खारिज होने का दावा है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित जमीन के रिकॉर्ड की जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।



पीड़ित का कहना है कि जमीन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं और वह प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखने को तैयार हैं। ऐसे में राजस्व अभिलेखों का सत्यापन और जमीन की पैमाइश इस विवाद में महत्वपूर्ण हो सकती है।
पुलिस को पहले सूचना देने का दावा
पीड़ित के अनुसार, बाउंड्री गिराए जाने से पहले और घटना के बाद उन्होंने स्थानीय चौकी तथा थाना स्तर के पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया था। उनका दावा है कि उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मियों को फोन और व्हाट्सऐप के माध्यम से जानकारी दी थी। पीड़ित का कहना है कि उनके पास भेजे गए संदेशों और घटना के वीडियो का रिकॉर्ड मौजूद है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद उन्हें तत्काल प्रभावी कार्रवाई होती नहीं दिखाई दी। पीड़ित के मुताबिक, बाद में जब उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारी से बातचीत की तो अधिकारी ने पहले मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही, जिसके बाद उन्होंने पूरी घटना दोबारा बताई।

एसीपी से मुलाकात, जांच का मिला आश्वासन
पीड़ित ने बताया कि वह अपनी बहू के साथ संबंधित एसीपी अधिकारी से मिलने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी दी। उनके अनुसार, अधिकारी ने उन्हें कुछ दिन इंतजार करने को कहा और जांच कराकर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों के सामने बाउंड्री गिराए जाने और पहले दी गई सूचना का मुद्दा भी उठाया।

इसके बाद उन्होंने डीजीपी कार्यालय से संपर्क किया। पीड़ित के मुताबिक, वहां से उन्हें दस्तावेज, प्रार्थना-पत्र और वीडियो व्हाट्सऐप पर भेजने के लिए एक नंबर दिया गया। साथ ही 24 घंटे के भीतर मामले को देखकर वैधानिक कार्रवाई कराने का आश्वासन मिलने की बात कही गई।
सबसे बड़ा सवाल—अब तक एफआईआर क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध सामने आता है, तो अब तक एफआईआर दर्ज करने को लेकर क्या कार्रवाई हुई है? क्या पुलिस ने घटना का वीडियो, व्हाट्सऐप संदेश और जमीन के दस्तावेजों की जांच की है? क्या संबंधित लोगों से पूछताछ की गई है? और पीड़ित की शिकायत पर अब तक क्या निष्कर्ष निकला है?

