मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली/भैरहवा। भारत-नेपाल सीमा पर भैरहवा भंसार कार्यालय में प्रवेश व्यवस्था को लेकर कई दिनों से चल रहा विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। नेपाल भंसार चीफ के निर्देश पर भंसार कार्यालय दोबारा खोल दिया गया है और आयात-निर्यात से जुड़ी सभी गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू हो गई हैं। समझौते के तहत फिलहाल अधिकृत व्यक्तियों को पहले की तरह कार्य करने की अनुमति दी गई है, जबकि भविष्य में कार्ड आधारित प्रवेश व्यवस्था लागू की जाएगी।


भंसार प्रमुख ने The India Express News से बातचीत में बताया कि दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक वार्ता के बाद गतिरोध समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि अधिकृत ट्रांसपोर्ट प्रतिनिधियों एवं दस्तावेज़ीकरण (Documentation) से जुड़े लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। जल्द ही सभी अधिकृत व्यक्तियों को पहचान-पत्र (कार्ड) जारी किए जाएंगे और उसी के आधार पर भंसार कार्यालय में प्रवेश दिया जाएगा।

नेपाल के एजेंट प्रकाश गिरी ने भी समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि व्यापार प्रभावित न हो, इसलिए तत्काल प्रभाव से कार्यालय खोल दिया गया है। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई प्रवेश व्यवस्था लागू की जाएगी।
इस बीच नेपाल सीमा शुल्क एजेंट महासंघ ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राजस्व सुरक्षा, पारदर्शिता और सुशासन को मजबूत करने के लिए लागू की गई सीमा शुल्क सुधार व्यवस्था को कमजोर करना राष्ट्रीय हित में नहीं है। महासंघ ने नेपाल सरकार, वित्त मंत्रालय और सीमा शुल्क विभाग से स्पष्ट एवं सुदृढ़ नीति अपनाने की अपील करते हुए कहा कि सीमा शुल्क क्षेत्र में केवल अधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश ही आधुनिक और जवाबदेह प्रशासन की पहचान है।

“उग्र होने से पहले निकल गया समाधान” : दीपक बाबा
पूरे घटनाक्रम पर भारतीय एजेंटों के वरिष्ठ नेता दीपक बाबा ने समाधान का स्वागत करते हुए कहा कि कई दिनों से चल रहा आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा था, लेकिन नेपाल भंसार चीफ और भारतीय कस्टम के असिस्टेंट कमिश्नर सुधीर कुमार त्यागी की पहल से समय रहते समाधान निकल आया।
दीपक बाबा ने कहा,
> “भंसार अब पहले की तरह सुचारु रूप से चलेगा। जिन लोगों के पास अधिकृत दस्तावेज़ होंगे, उन्हें नियमों के अनुसार प्रवेश मिलेगा। मैं नेपाल भंसार चीफ, असिस्टेंट कमिश्नर सुधीर कुमार त्यागी, नेपाल और भारत के सभी एजेंट संगठनों तथा इस आंदोलन में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े सभी लोगों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।”

उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक संगठन का आंदोलन नहीं था, बल्कि भारत और नेपाल के व्यापारिक हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय था। सभी पक्षों के संयम, संवाद और सहयोग से इसका शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सका।
“व्यापार को भारी नुकसान हुआ”
दीपक बाबा ने कहा कि यदि विवाद लंबा खिंचता तो सीमा पर मालवाहक वाहनों की लंबी कतार लग जाती और व्यापारियों को डिमरेज, स्टैंडिंग चार्ज समेत भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान व्यापार पहले ही काफी प्रभावित हुआ है और वास्तविक नुकसान का आकलन करना आसान नहीं है।
उन्होंने मीडिया की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान दोनों देशों के बीच संतुलित और जिम्मेदार रिपोर्टिंग हुई, जिससे सही जानकारी लोगों तक पहुंची और समाधान का माहौल बना।
अब भंसार कार्यालय खुलने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर आयात-निर्यात का कार्य सामान्य हो गया है। वहीं, प्रस्तावित कार्ड आधारित प्रवेश व्यवस्था लागू होने के बाद भंसार परिसर में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश मिलेगा, जिससे सुरक्षा, पारदर्शिता और व्यापारिक सुगमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।