भंसार चीफ बोले—गृह मंत्रालय, नेपाल से लेनी होगी अनुमति; सुरक्षा के मद्देनजर बिना परमिशन कोई राहत सामग्री सीमा पार नहीं होगी
सोनौली/महराजगंज। नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद पीड़ितों की मदद के लिए भारत के विभिन्न राज्यों से राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच रहे NGO और सामाजिक संगठनों के सामने अब सोनौली बॉर्डर पर अनुमति की बड़ी बाधा सामने आ रही है। पिछले दो दिनों में राहत सामग्री लेकर सोनौली पहुंचे कई वाहनों को आवश्यक अनुमति नहीं होने के कारण वापस लौटना पड़ा।

पंजाब, हरियाणा समेत अन्य राज्यों से सामाजिक संगठनों और NGO की गाड़ियां नेपाल में आपदा प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य से सोनौली बॉर्डर पहुंचीं। लेकिन निर्धारित अनुमति और प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण कई वाहनों को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी गई।
मामले को लेकर The IndiaExpress News के निदेशक मनोज कुमार त्रिपाठी ने हरिहर पौडेल प्रमुख भन्सार अधिकृत से बातचीत कर पूरे प्रकरण की जानकारी ली। बातचीत में भंसार चीफ ने स्पष्ट किया कि नेपाल में राहत सामग्री लेकर प्रवेश करने वाले वाहनों को संबंधित गृह मंत्रालय, नेपाल से आवश्यक अनुमति/आदेश प्राप्त करना होगा।

भंसार चीफ के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बिना आवश्यक परमिशन के किसी भी वाहन अथवा सामान को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यानी राहत सामग्री होने मात्र से किसी वाहन को नेपाल में प्रवेश नहीं मिल सकेगा, बल्कि निर्धारित सरकारी प्रक्रिया और अनुमति का पालन करना अनिवार्य होगा।
दो दिनों में कई वाहन लौटे, सवाल भी उठे
सोनौली बॉर्डर पर लगातार दूसरे दिन राहत सामग्री लेकर पहुंचे वाहनों के वापस लौटने से सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि पंजाब और हरियाणा समेत अलग-अलग राज्यों से कुछ NGO राहत सामग्री लेकर पहुंचे थे, लेकिन आवश्यक अनुमति नहीं होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
इन संगठनों का उद्देश्य नेपाल में आपदा प्रभावित परिवारों तक खाद्य सामग्री, तिरपाल, कपड़े और अन्य जरूरी सामान पहुंचाना था। लेकिन सीमा पर अनुमति की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण राहत सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचने से पहले ही रुक गई।
गायत्री परिवार की गाड़ियों को मिली अनुमति
इसी बीच राहत सामग्री लेकर पहुंची गायत्री परिवार की चार गाड़ियों का मामला भी सामने आया। इस संबंध में The IndiaExpress News के निदेशक मनोज कुमार त्रिपाठी ने भंसार चीफ से जानकारी ली।
भंसार चीफ ने बताया कि गायत्री परिवार के पास संबंधित मंत्रालय से अनुमति थी, जिसके चलते उनकी गाड़ियों के संबंध में स्थिति अलग रही।


यही वजह है कि अब यह स्पष्ट होता दिखाई दे रहा है कि नेपाल में राहत सामग्री ले जाने वाले संगठनों के लिए पूर्व अनुमति सबसे महत्वपूर्ण शर्त बन गई है।
सुरक्षा के नाम पर सख्ती, राहत के रास्ते पर प्रक्रिया जरूरी
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद भारत से बड़ी संख्या में सामाजिक संगठन मदद के लिए आगे आ रहे हैं। ऐसे में सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार की सामग्री को सीमा पार करने की अनुमति देना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।


हालांकि, दूसरी तरफ सवाल यह भी है कि जब देशभर से लोग मानवीय आधार पर नेपाल के आपदा प्रभावितों की मदद के लिए निकल रहे हैं, तो उन्हें अनुमति की पूरी प्रक्रिया की जानकारी पहले से क्यों नहीं मिल पाती?
हजारों किलोमीटर का सफर तय कर राहत सामग्री लेकर बॉर्डर पहुंचने के बाद यदि कोई वाहन वापस लौटता है, तो इससे न केवल संगठन को परेशानी होती है, बल्कि जरूरतमंदों तक पहुंचने वाली राहत में भी देरी होती है।

अब साफ है नियम—पहले परमिशन, फिर बॉर्डर पार
सोनौली बॉर्डर पर पिछले दो दिनों में सामने आए घटनाक्रम के बाद राहत सामग्री लेकर नेपाल जाने वाले NGO और सामाजिक संगठनों के लिए संदेश साफ है—
बिना आवश्यक अनुमति राहत सामग्री लेकर सोनौली पहुंचना पर्याप्त नहीं होगा। पहले नेपाल के संबंधित गृह मंत्रालय से आवश्यक आदेश/अनुमति लेनी होगी, उसके बाद ही सामग्री को सीमा पार ले जाने की अनुमति मिल सकेगी।
आपदा की घड़ी में मदद के लिए उठे हाथों को सीमा पर परेशानी न हो, इसके लिए भारत और नेपाल की संबंधित एजेंसियों की ओर से राहत सामग्री ले जाने की अनुमति प्रक्रिया को स्पष्ट और सरल किए जाने की जरूरत भी महसूस की जा रही है।
क्योंकि राहत की गाड़ी अगर बॉर्डर पर रुक गई, तो मदद उस व्यक्ति तक कैसे पहुंचेगी जिसके लिए वह भेजी गई है?


