मोटर साइकिल की डिग्गी से रुपए बरामद
मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज! भारत-नेपाल सीमा पर अवैध मुद्रा की तस्करी के खिलाफ सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को बड़ी सफलता मिली है। 22 वीं वाहिनी एसएसबी की शीतलापुर सीमा चौकी की टीम ने 10 लाख नेपाली रुपये के साथ एक नेपाली युवक को गिरफ्तार किया है।
आरोपी भारत से नेपाल की ओर मोटरसाइकिल से जा रहा था। एसएसबी जवानों को देखकर उसने भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी कर उसे मौके पर ही पकड़ लिया गया। बरामद नेपाली मुद्रा, बाइक और मोबाइल फोन को जब्त कर आरोपी को आगे की कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क विभाग, निचलौल के सुपुर्द कर दिया गया।
एसएसबी को 10 जुलाई को आसूचना शाखा से सूचना मिली थी कि एक नेपाली नागरिक सीमा स्तंभ संख्या-501 के पास से भारत से नेपाल की ओर बड़ी मात्रा में नेपाली मुद्रा लेकर जाने वाला है। सूचना मिलते ही सीमा चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक धनबीर सिंह रावत के नेतृत्व में विशेष गश्ती दल गठित कर निगरानी बढ़ा दी गई।
गश्त के दौरान जवानों ने भारत से नेपाल की ओर जा रही एक मोटरसाइकिल को रोकने का संकेत दिया। एसएसबी को देखते ही चालक ने बाइक मोड़कर भारत की ओर भागने का प्रयास किया, लेकिन सतर्क जवानों ने कुछ ही दूरी पर उसे पकड़ लिया।
तलाशी लेने पर मोटरसाइकिल (UP 56 BB 1913) की डिग्गी से 500 नेपाली रुपये के 2000 नोट, यानी कुल 10 लाख नेपाली रुपये बरामद हुए। इसके अलावा एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। गिरफ्तार युवक की पहचान नेपाल के नवलपरासी जिले के बसहिया गांव निवासी 22 वर्षीय शिव कुमार कोइरी के रूप में हुई।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसे निचलौल निवासी एक व्यक्ति से 6 लाख भारतीय रुपये मिले थे। उसने दावा किया कि ठूठीबारी स्थित एक जनरल स्टोर पर इन रुपयों के बदले 10 लाख नेपाली रुपये लिए गए थे, जिन्हें वह नेपाल ले जा रहा था। आरोपी ने इसे तीन महीने पुराने कबाड़ के बकाये का भुगतान बताया, लेकिन अपने दावे के समर्थन में कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
एसएसबी ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बरामद नेपाली मुद्रा, मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और गिरफ्तार युवक को सीमा शुल्क विभाग, निचलौल के हवाले कर दिया। अब सीमा शुल्क विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है।
प्रारंभिक जांच में बरामद नेपाली मुद्रा को संदिग्ध और तस्करी से जुड़ी धनराशि माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अवैध लेन-देन के पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। सीमा पर निगरानी और गश्त को भी और सख्त कर दिया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।