पांच साल से परिवार से दूर था एक नेपाली किशोर, KIN India के नवीन जोशी ने बताया पूरा रेस्क्यू अभियान; रुपन्देही के भैरहवा की उपप्रमुख उमा अधिकारी ने मानव तस्करी पर जताई चिंता
मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली/नई दिल्ली। भारत के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे छह नेपाली बच्चों को रेस्क्यू कर नेपाल वापस ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें तीन बालिकाएं और तीन बालक शामिल हैं। बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए नेपाल दूतावास, KIN India और संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय किया गया है।

नेपाल दूतावास, नई दिल्ली की ओर से 25 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार, KIN India के प्रतिनिधि नवीन जोशी और लक्ष्मी बिष्ट को संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय कर रेस्क्यू किए गए नेपाली नागरिकों को नेपाल ले जाने के लिए अधिकृत किया गया है।
शादी का झांसा देकर ऑर्केस्ट्रा में रखने का आरोप
KIN India के प्रतिनिधि नवीन जोशी ने बताया कि रेस्क्यू की गई तीन बालिकाओं में एक किशोरी को कथित तौर पर शादी का झांसा देकर अपने साथ रखा गया और ऑर्केस्ट्रा में नचाया जा रहा था। जोशी के मुताबिक जिस व्यक्ति पर यह आरोप है, वह पहले से शादीशुदा था।

नवीन जोशी ने बताया कि करीब 20 दिन पहले NHRC के सहयोग से 40 लड़कियों को रेस्क्यू किया गया था। उनके मुताबिक इनमें 39 भारतीय और एक नेपाली बालिका थी। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद नेपाली बालिका को भी नेपाल वापस लाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि दो अन्य बालिकाओं को पश्चिमी चंपारण से रेस्क्यू किया गया था।
पांच साल बाद परिवार से मिलेगा नेपाली किशोर
नवीन जोशी के अनुसार, रेस्क्यू किए गए बच्चों में एक ऐसा नेपाली किशोर भी है, जो करीब पांच साल से अपने परिवार से दूर था। अब उसे नेपाल ले जाकर परिवार से मिलाने की तैयारी है।

उन्होंने बताया कि बच्चों को नेपाल पहुंचने के बाद शेल्टर में रखा जाएगा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जाएगा।
दस्तावेज में छह बच्चों का विवरण
नेपाल दूतावास के दस्तावेज में छह बच्चों का विवरण दर्ज है। इनमें दीपेन्द्र हजारा (14), शिव कुमार सदा (17), अनिशा कुमारी उर्फ अंजली (17), बबिता कुमारी उर्फ प्रियंका कुमारी (17), आरती बी.के. (17) और आकाश महतो (17) शामिल हैं।
दस्तावेज के अनुसार ये बच्चे नेपाल के सरलाही, सप्तरी, चितवन और मोरंग जिलों से संबंधित हैं।

रुपन्देही के भैरहवा की उपप्रमुख उमा अधिकारी ने जताई चिंता
रुपन्देही के भैरहवा स्थित सिद्धार्थनगर नगरपालिका की उपप्रमुख एवं बाल अधिकार समिति की संयोजक उमा अधिकारी ने छह नेपाली बच्चों की सुरक्षित वापसी का स्वागत किया।
उमा अधिकारी ने कहा कि बच्चों को उनके परिवारों तक वापस पहुंचाना महत्वपूर्ण कार्य है और स्थानीय सरकार इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेगी।
उन्होंने भारत-नेपाल की खुली सीमा का जिक्र करते हुए कहा कि सीमा खुली होने के कारण आवाजाही आसान है और इसका दुरुपयोग मानव तस्करी के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने मानव तस्करी को गंभीर अपराध बताते हुए बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए दोनों देशों की सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
नेपाल दूतावास के पत्र में सहयोग की अपील
नेपाल दूतावास के पत्र में संबंधित अधिकारियों से रेस्क्यू किए गए नेपाली नागरिकों को नेपाल ले जाने के दौरान आवश्यक सहयोग देने का अनुरोध किया गया है। पत्र के अनुसार, नेपाल पहुंचने के बाद इन्हें परिवारों अथवा संबंधित सरकारी एजेंसियों को अधिकारियों की मौजूदगी में सौंपा जाएगा।
छह बच्चों की यह घर वापसी उन परिवारों के लिए बड़ी उम्मीद है, जो लंबे समय से अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रहे थे। वहीं, रेस्क्यू अभियान के दौरान सामने आए आरोप भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी रोकने के लिए लगातार समन्वय की जरूरत को सामने रखते हैं।
ऑर्केस्ट्रा और मानव तस्करी से जुड़े आरोप नवीन जोशी के बयान पर आधारित हैं; इन्हें खबर में आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।
