मनोज कुमार त्रिपाठी
नेपाल में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए “अतिथि देवो भव:” का नारा लगातार दिया जाता है, लेकिन हाल के दिनों में भारतीय पर्यटकों के साथ सामने आ रही घटनाओं ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला भैरहवा स्थित गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल का है, जहां भारत से आए 94 सदस्यीय पर्यटक समूह के लीडर को बड़ी मात्रा में भारतीय मुद्रा के साथ रोके जाने के बाद पर्यटन क्षेत्र में बहस छिड़ गई है।
नेपाल में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए “अतिथि देवो भव:” का नारा लगातार दिया जाता है, लेकिन हाल के दिनों में भारतीय पर्यटकों के साथ सामने आ रही घटनाओं ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला भैरहवा स्थित गौतमबुद्ध अंतरराष्ट्रीय विमानस्थल का है, जहां भारत से आए 94 सदस्यीय पर्यटक समूह के लीडर को बड़ी मात्रा में भारतीय मुद्रा के साथ रोके जाने के बाद पर्यटन क्षेत्र में बहस छिड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, आंध्र प्रदेश से अयोध्या होते हुए नेपाल भ्रमण पर आए 94 सदस्यीय दल के ग्रुप लीडर भीमा श्रीनिवास को शनिवार को उस समय रोक लिया गया, जब वह भैरहवा से काठमांडू जाने वाली उड़ान में सवार होने की तैयारी कर रहे थे। उनके पास से लगभग 8 लाख भारतीय रुपये बरामद होने की बात सामने आई है। यह समूह नेपाल के विभिन्न धार्मिक एवं पर्यटक स्थलों, विशेष रूप से मुक्तिनाथ और पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए आया था
इस घटना के बाद पर्यटन और होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि 94 लोगों का एक संगठित समूह यात्रा कर रहा है, तो समूह के आवागमन, होटल, भोजन, परमिट और अन्य व्यवस्थाओं के लिए ग्रुप लीडर के पास नकदी होना असामान्य नहीं है।
पर्यटन व्यवसायियों का तर्क है कि नेपाल सरकार की ओर से एक व्यक्ति को निर्धारित सीमा तक ही भारतीय मुद्रा रखने की अनुमति दी गई है। ऐसे में जब एक ग्रुप लीडर दर्जनों यात्रियों की व्यवस्था संभाल रहा हो, तब केवल नकदी की कुल मात्रा के आधार पर उसे रोकना समझ से परे है। मुक्तिनाथ यात्रा के दौरान विभिन्न प्रकार के परमिट और व्यवस्थागत खर्च होते हैं, जिन्हें देखते हुए समूह प्रमुख के पास अतिरिक्त धनराशि होना स्वाभाविक है।

इस घटना ने इसलिए भी अधिक चर्चा बटोरी है क्योंकि हाल के दिनों में भारतीय पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कुछ समय पहले सीमा क्षेत्र में स्थानीय लोगों द्वारा भारतीय पर्यटकों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला भी चर्चा में रहा था। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं नेपाल की पर्यटन-अनुकूल छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
भैरहवा होटल व्यवसायी संघ के अध्यक्ष सी.पी. वर्मा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि यदि पर्यटकों के साथ इसी प्रकार का व्यवहार जारी रहा, तो इसका सीधा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नेपाल आने वाले पर्यटक केवल धार्मिक यात्रा ही नहीं करते, बल्कि स्थानीय होटल, परिवहन, व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हैं।
वहीं पर्यटन व्यवसाय से जुड़े संजय बजिमय ने भी इस प्रकरण पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। नई सरकार के गठन के बाद आर्थिक गतिविधियों को गति देने की आवश्यकता है, और ऐसे समय में पर्यटन ही एक ऐसा क्षेत्र है जिसने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है।
संजय बजिमय के अनुसार, यदि भारतीय पर्यटकों को बार-बार अनावश्यक परेशानी, अपमानजनक व्यवहार या प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करना पड़ेगा, तो इसका सीधा असर नेपाल आने वाले पर्यटकों की संख्या पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन विश्वास पर चलता है और विश्वास टूटने में समय नहीं लगता।
पर्यटन व्यवसायियों का मानना है कि नियमों का पालन आवश्यक है, लेकिन उनके क्रियान्वयन में व्यवहारिकता और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। उनका कहना है कि नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध हैं; ऐसे में भारतीय पर्यटकों के साथ होने वाली हर घटना का व्यापक संदेश जाता है।
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि वह इस मामले की निष्पक्ष समीक्षा करे और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए स्पष्ट एवं पर्यटक-अनुकूल व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि अतिथि देवो भव: केवल एक नारा बनकर न रह जाए, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई दे।