मरचाहे बाबा कुटी निर्माण कार्य में ठेकेदारी, कार्य गुणवत्ता पर उठे सवाल 

ईओ संदीप कुमार सरोज ने दी सफाई

मनोज कुमार त्रिपाठी 

नौतनवा, महराजगंज। नगर पालिका परिषद नौतनवा के अंतर्गत मरचाहे बाबा कुटी (रामजानकी मंदिर) में लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से चल रहे विकास कार्यों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। निर्माण की गुणवत्ता, ठेका आवंटन और कथित रिश्तेदारी को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) संदीप कुमार सरोज ने सभी कार्यों को नियमानुसार बताया है।

निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार नितेश मणि त्रिपाठी ने बातचीत के दौरान बताया कि टिन शेड निर्माण का लगभग 37 लाख रुपये का ठेका उनके पास है। इसी दौरान उन्होंने स्वयं को चेयरमैन के घर का भी बताया। जब उनसे टिन शेड में इस्तेमाल की जा रही शीट की मोटाई (एमएम) के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “अभी तो यह जे.ई. साहब ही जानते हैं।” इस बयान के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर सवाल उठाए हैं।

परियोजना से जुड़े उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार दो करोड़ रुपये की स्वीकृत योजना में विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित किया गया है। इसमें हार्ड/विकास संबंधी निर्माण कार्य के लिए 39.63 लाख रुपये, टिन शेड निर्माण के लिए 37.90 लाख रुपये, सीसी रोड के लिए 11.32 लाख रुपये, इंटरलॉकिंग के लिए 29.46 लाख रुपये, फ्लैक्स व्यवस्था के लिए 19.76 लाख रुपये, बेंच एवं डस्टबिन के लिए 9.44 लाख रुपये, पार्क निर्माण के लिए 22.25 लाख रुपये तथा जीर्णोद्धार कार्य के लिए 30.24 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। दस्तावेज के अनुसार अब तक 50 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है।

ईओ ने बताया कि परियोजना की कुल लागत लगभग दो करोड़ रुपये है, जबकि अब तक 50 लाख रुपये की धनराशि प्राप्त हुई है। लगभग 25 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद उसी अनुपात में भुगतान किया गया है। उन्होंने बताया कि भुगतान से पहले संबंधित समिति, एसडीएम, अधिशासी अधिकारी सहित सक्षम अधिकारियों द्वारा त्रिस्तरीय जांच की जाती है। साथ ही भुगतान के समय नियमानुसार 18 प्रतिशत जीएसटी, 2 प्रतिशत आयकर, 1 प्रतिशत लेबर सेस सहित अन्य देय शुल्क काटे जाते हैं।

फिलहाल, ठेकेदार के बयान, स्थानीय लोगों के आरोप और ईओ की सफाई आमने-सामने हैं। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, ठेका प्रक्रिया और कथित रिश्तेदारी से जुड़े आरोपों की सच्चाई प्रशासनिक जांच और आधिकारिक अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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