कांग्रेस आलाकमान फरेंदा के विधायक वीरेंद्र चौधरी पर लगा सकती है दांव,सूत्र
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
यूपी में प्रदेश प्रभारी बदलने के बाद कांग्रेस अब प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव को भी सोच रही है। वह आसन्न विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है जिसका फायदा चुनाव में भी मिले। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम के पहले यहां अविनाश पांडेय प्रभारी थे। आम आदमी पार्टी से दो साल पहले आए राजेन्द्र गौतम को अनुसूचित विभाग का चेयरमैन बनाया गया और उसके ठीक साल भर बाद यूपी का प्रभारी बना दिया गया।
राजेन्द्र गौतम कांग्रेस में प्रमुख दलित चेहरा हैं और दलित समाज में उनका काफी सम्मान भी है। जाहिर है उनका मनोनयन चुनावी दृष्टि से ही किया गया है।
कांग्रेस अध्यक्ष बदलने को लेकर पार्टी के समक्ष असमंजस यह है कि वह किसी बैकवर्ड को अध्यक्ष बनाए या किसी ब्राह्मण को। यद्यपि कि अजय राय अभी प्रदेश अध्यक्ष हैं, और उनका कार्यकाल अच्छे से चल भी रहा है लेकिन पार्टी उनको वाराणसी और आसपास के जिलों के लिए फ्री हैंड करना चाहती है ताकि इसका फायदा विधानसभा चुनावों में मिल सके।

यूपी में फिलहाल कांग्रेस के पास कोई दमदार ब्राह्मण चेहरा नहीं है और जो हैं वे भाजपा के स्लीपर सेल हैं। मतलब कि यदि उन्हें या उनके सजातीय को टिकट नहीं मिला तो वे भाजपा की मददगार होते हैं। ले दे कर एक प्रमोद तिवारी बचते हैं तो उनकी उम्र अब इस लायक नहीं रही कि वे संगठन में बेहतर परिणाम दे सके। अभी वे राज्य सभा में हैं और उनकी बेटी मोना मिश्रा विधानसभा सदस्य हैं।
प्रमोद तिवारी कांग्रेस में प्रमुख ब्राह्मण चेहरा तो हैं लेकिन जब उनके राजनीतिक प्रभाव पर नजर डालें तो वह प्रतापगढ़ जिले के रामपुर खास विधानसभा क्षेत्र से आगे बढ़ता हुआ नहीं दिखता। कांग्रेस पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के लिए वाकई किसी ब्राह्मण पर दांव लगाना चाहती है तो फिलहाल उसे यूपी के बाहर से लाना होगा या फिर किसी निष्प्रभावी चेहरे पर समझौता करना होगा।
अब बैकवर्ड चेहरे की बात करें जैसा कि पार्टी के अंदर इस पर भी मंथन चल रहा है तो इसमें ढेर सारे नाम हैं जिसमें एक महराजगंज जिले के फरेंदा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक वीरेंद्र चौधरी भी हैं। वीरेंद्र चौधरी उसी जिले के निवासी हैं जहां से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी सांसद हैं। दोनों की बिरादरी भी एक है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में वीरेंद्र चौधरी ने सात बार के सांसद पंकज चौधरी को कड़ी टक्कर दी थी। ऐसा कई सालों बाद हुआ जब पंकज चौधरी को कांग्रेस उम्मीदवार से ऐसी चुनौती मिली हो। चुनौती एसा था कि हमेशा डेढ़ दो लाख वोटों से चुनाव जीतने वाले पंकज चौधरी इस बार कुछ 35 हजार वोटों से ही चुनाव जीत पाए।
महराजगंज जिले के लोगों का कहना है कि वीरेंद्र चौधरी के टिकट का फैसला यदि दो महीने पहले हुआ होता तो पंकज चौधरी की राह मुश्किल थी।
वीरेंद्र चौधरी के पास सांगठनिक अनुभव भी है। वे कई सालों तक संगठन में प्रमुख पदों पर रहे हैं। यूपी में कांग्रेस पार्टी में उनकी अच्छी खासी शिनाख्त है और वे कुर्मी बिरादरी में अच्छी पैठ रखते हैं। पार्टी के अंदर खाने खबर है कि पार्टी यदि किसी बैकवर्ड पर दांव लगाना चाहेगी तो वीरेंद्र चौधरी बेहतर विकल्प हो सकते हैं। मजे की बात यह है कि एक ही जिले से भाजपा और कांग्रेस का अध्यक्ष होने से यूपी में सांगठनिक क्षमता की ऐसी होड़ मचेगी जो देखने लायक होगी। फिलहाल अध्यक्ष पद के लिए बैकवर्ड और ब्राह्मण चेहरे के बीच उलझी कांग्रेस किस वर्ग पर दांव लगाती है यह देखना होगा।