वृंदावन सेक्टर-7 की पी-4 पार्किंग में बनेगा आधुनिक बस टर्मिनल, 75 प्लेटफॉर्म से होगा 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन; लखनऊ में पहले चरण में 14 मार्गों पर दौड़ेंगी 150 ई-बसें
मनोज कुमार त्रिपाठी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में राजधानी लखनऊ को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। वृंदावन योजना के सेक्टर-7 स्थित पी-4 पार्किंग में करीब 265 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का पहला ई-बस पोर्ट विकसित करने की योजना है। इस परियोजना के पूरा होने से राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को नई गति मिलने और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित ई-बस पोर्ट में 75 प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे, जहां से 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा सकेगा। परियोजना के तहत जमीन के लगभग 45 प्रतिशत हिस्से में निर्माण प्रस्तावित है। कैबिनेट के फैसले के बाद नगरीय परिवहन निदेशालय की ओर से कार्यदायी संस्था ओमेक्स को लेटर ऑफ अवार्ड जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। निर्माण कार्य अगले महीने शुरू करने की तैयारी बताई गई है।
एक साल में खरीदी जाएंगी 1,725 नई इलेक्ट्रिक बसें
प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए एक वर्ष के भीतर 1,725 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की योजना है। प्रस्ताव के अनुसार, लखनऊ और कानपुर को 300-300 बसें मिलेंगी, जबकि शेष 1,125 बसें प्रदेश के 15 अन्य शहरों में संचालित की जाएंगी। बसों की खरीद में उत्तर प्रदेश के तीन निर्माताओं को प्राथमिकता देने की योजना भी शामिल है।
लखनऊ में दो चरणों में होगा बसों का संचालन
राजधानी को मिलने वाली 300 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में 150 बसें 14 मार्गों पर चलाई जाएंगी। लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट की ओर से इन 14 मार्गों की सर्वे रिपोर्ट नगरीय परिवहन निदेशालय को सौंपे जाने की जानकारी है।
इन 300 बसों में 100 बसें नौ मीटर और 200 बसें 12 मीटर लंबी होंगी। अनुमान है कि नई बस सेवा से प्रतिदिन करीब 25 से 30 हजार यात्रियों को लाभ मिल सकता है। इससे शहर में आवागमन आसान होने के साथ ही सार्वजनिक परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रदूषण कम करने और यातायात सुधारने की उम्मीद
इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और शहरी परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक असर निर्माण पूरा होने, बसों की उपलब्धता और निर्धारित मार्गों पर नियमित संचालन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
लखनऊ में प्रस्तावित ई-बस पोर्ट को राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगाहें निर्माण कार्य शुरू होने और नई बसों के संचालन की समयसीमा पर रहेंगी।

