गोरखपुर
कवि मिलिंद गुप्ता की प्रेरणादायक कविता “गुज़रता हुआ ये वक़्त” जीवन में सही दिशा, धैर्य और आत्मविश्वास का संदेश देती है। यह कविता बताती है कि जीवन दूसरों से आगे निकलने की दौड़ नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य की ओर सही मार्ग पर निरंतर बढ़ने की यात्रा है।
कविता में कवि ने वर्तमान समय में दूसरों से तुलना करने की प्रवृत्ति पर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि केवल तेज़ गति से चलना सफलता की गारंटी नहीं है। यदि दिशा सही नहीं होगी, तो तेज़ रफ्तार भी व्यक्ति को मंज़िल से दूर ले जाएगी। वहीं, सही रास्ते पर धैर्यपूर्वक बढ़ाया गया हर कदम अंततः सफलता तक पहुंचाता है।
कविता का मूल संदेश है कि व्यक्ति को समय से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय अपने निर्णयों, मूल्यों और सही दिशा पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आज लिया गया प्रत्येक निर्णय ही भविष्य की पहचान तय करता है।
कविता
गुज़रता हुआ ये वक़्त, बस बहती एक धार है,
दिशाहीन होकर भागना, सबसे बड़ी हार है।
नापते हैं हम ख़ुद को अक्सर, औरों की घड़ी से,
पर दूरी कभी मिटती नहीं, रफ़्तार की लड़ी से।
ज़िंदगी कोई दौड़ नहीं, एक शांत सा ख़्वाब है,
तेज़ चलना नहीं, सही राह ही इसका जवाब है।
गलत दिशा का हर कदम, बस भटकाव लाएगा,
धीमा ही सही, सही रास्ता ही मंज़िल दिखाएगा।
आज का लिया हर फैसला, तेरी पहचान तय करेगा,
तू कहाँ पहुँचेगा कल, यह तेरा आज तय करेगा।
सीख यही है कि वक़्त से कभी होड़ ना लगाना,
तेज़ भागने के चक्कर में अपनी राह ना गंवाना।
वक़्त का क्या है, यह तो यूँ ही ढल जाएगा…
तू सही राह पर चलना, मंज़िल का रुख खुद तेरी ओर मुड़ जाएगा।
— रचनाकार: मिलिंद गुप्ता :::