रिपोर्ट: मनोज कुमार त्रिपाठी
द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़
महराजगंज। सिंचाई विभाग के एक बाबू का कथित वायरल वीडियो सामने आने के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। वीडियो में मनरेगा कार्यों में कथित कमीशनखोरी और अधिकारियों के नाम लिए जाने के दावों के बीच अब विभाग पर मामले को दबाने और आरोपी को बचाने की कोशिश के आरोप भी लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता को विभागीय कार्यालय बुलाकर उसे समझाने तथा उसका पक्ष बदलवाने का प्रयास किए जाने की चर्चा है। यह भी कहा जा रहा है कि पूरे प्रकरण को शांत कराने के लिए लगातार अंदरखाने बैठकों का दौर चल रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चर्चा यह भी है कि अयोध्या में तैनात रहे “सेटलमेंट मैन” के नाम से चर्चित एक कर्मचारी की भूमिका भी इस मामले में सामने आ रही है। विभागीय गलियारों में इस संबंध में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
वायरल वीडियो में सिंचाई विभाग के बाबू अमित यादव द्वारा मनरेगा कार्यों में कथित कमीशन और जिलाधिकारी तक पैसे पहुंचाने जैसी बातें कहे जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वीडियो में किए गए दावों की सत्यता की अभी तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों का कहना है कि यदि पूरे मामले की जांच किसी बाहरी या गैर जनपद के अधिकारी से कराई जाती है, तो कई अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं। वहीं जिस विभाग पर आरोप लगे हैं, उसी विभाग द्वारा जांच कराए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
बताया जाता है कि मामले की चर्चा के दौरान एक कर्मचारी ने मीडिया को जांच की जानकारी दिए जाने की बात कही, जिस पर संबंधित अधिकारी ने मुस्कुराते हुए “अच्छा किया” कहकर प्रतिक्रिया दी। इसके बाद जांच की पारदर्शिता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले में अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न केवल सिंचाई विभाग बल्कि मनरेगा कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। वहीं यदि आरोप गलत सिद्ध होते हैं, तो संबंधित पक्षों को भी इसका लाभ मिलेगा। इसलिए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच को ही पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।