पेपर लीक, शिक्षा, किसानों और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरा, अभिषेक जोशी ने लगाए कई आरोप
“अगर एक बार भाजपा की सरकार गई, तो 80 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी” — प्रदर्शन के दौरान अभिषेक जोशी का दावा
मनोज कुमार त्रिपाठी
नौतनवा (महराजगंज), 20 जुलाई। लद्दाख के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में रविवार को नौतनवा तहसील परिसर में युवाओं ने प्रदर्शन करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी (SDM) को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने बैनर-पोस्टर के साथ नारेबाजी की और प्रशासन को प्रतीकात्मक रूप से लड्डू भेंट कर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह लड्डू खुशी का नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति व्यंग्य का प्रतीक है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सोनम वांगचुक और उनके साथियों की गिरफ्तारी शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उनके लोकतांत्रिक अधिकार बहाल किए जाएं तथा नागरिकों की आवाज को प्रशासनिक शक्ति के बल पर दबाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे। साथ ही चेतावनी दी कि यदि युवाओं, किसानों और आम जनता के मुद्दों की अनदेखी जारी रही तो भविष्य में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में प्रदर्शन में शामिल अभिषेक जोशी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उनका आरोप था कि सरकार युवाओं की समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं है।


अभिषेक जोशी ने किसानों की समस्याओं, महंगी खाद, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, मणिपुर की स्थिति और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कई केंद्रीय मंत्रियों के कामकाज की आलोचना करते हुए कहा कि यदि युवाओं और किसानों के मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव में जवाब देगी। इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि “अगर एक बार भाजपा की सरकार गई, तो 80 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिले में जनता और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया जाता रहेगा और जनहित की लड़ाई जारी रहेगी। प्रदर्शन के अंत में युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर कठोर कार्रवाई, किसानों की समस्याओं के समाधान तथा नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।