सोनौली बॉर्डर पर ई-स्कूटर तस्करी का बड़ा खुलासा, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका

भंसार प्रक्रिया पर उठे सवाल, प्रति स्कूटी अवैध वसूली के आरोपों से मचा हड़कंप

द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज ब्यूरो

सोनौली ! भारत-नेपाल सीमा के सोनौली बॉर्डर और नौतनवा क्षेत्र में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की कथित तस्करी से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में ई-स्कूटरों को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अवैध रूप से सीमा पार भेजे जाने की आशंका जताई जा रही है। मामले में हजारों स्कूटरों के शामिल होने की चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में भंसार (कस्टम) प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताओं के आरोप भी लगे हैं। दावा किया जा रहा है कि प्रति स्कूटी करीब 10 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

बताया जा रहा है कि यह मुद्दा पिछले कुछ महीनों से स्थानीय स्तर पर उठाया जा रहा था, जिसके बाद प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी। जांच के दौरान दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद एक संदिग्ध एजेंसी का संचालन बंद कर दिया गया। इससे पूरे नेटवर्क के बड़े होने की आशंका भी जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल में ऊंचे भंसार शुल्क के कारण इलेक्ट्रिक स्कूटरों की कीमत बढ़ जाती है, जिससे अवैध व्यापार को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में सीमाई इलाकों में निगरानी और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को और सख्त करने की जरूरत बताई जा रही है।

इस मामले ने एक गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है—जब इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने के लिए आधार जैसे पहचान पत्र जरूरी होते हैं, तो इतनी बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की सत्यता क्या है। आशंका जताई जा रही है कि कहीं फर्जी या दुरुपयोग किए गए पहचान पत्रों के जरिए इस पूरे नेटवर्क को संचालित तो नहीं किया गया। यदि ऐसा है, तो यह मामला केवल तस्करी तक सीमित न रहकर पहचान प्रणाली की सुरक्षा और सीमा पार प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता से भी जुड़ जाता है।

फिलहाल, पूरे मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग उठ रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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