सर्व समाज में पैठ रखने वाला ही 2027 में होगा चिल्लूपार का विधायक
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
गोरखपुर! चिल्लूपार में 1980 से भृगुनाथ चतुर्वेदी के विधायक बनने के बाद से आज तक इस सीट पर ब्राम्हण प्रत्याशियों का ही दबदबा रहा है। सन् 1952 और 1971 में भी भृगुनाथ चतुर्वेदी विधानसभा में यहां का प्रतिनिधित्व किये थे । कैलाशवती
मिश्र भी 1957 में विधायक रहीं । इसके पहले चार बार कल्पनाथ सिंह यहां से प्रतिनिधत्व किये थे।
1985 से बाहुबली ब्राम्हण विधायक हरि शंकर तिवारी लगातार 2007 तक विधायक रहे। 2007 से राजेश त्रिपाठी की इन्ट्री इस क्षेत्र से हुई वह भी तीन बार यहां से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और वर्तमान में यहां से विधायक भी हैं।

साल 2017 में पंडित हरि शंकर तिवारी के
पुत्र विनय शंकर तिवारी पहली बार विधायक बने। इस क्षेत्र में 1980 से ब्राम्हण प्रत्याशी ही इसका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
वर्तमान समय में यहां से सभी पार्टीयां
ब्राम्हण प्रत्याशी पर ही जोर लगा रही हैं। श्री प्रकाश शुक्ला जिनको माफिया डॉन कहा जाता था वह भी इसी क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करना चाहते थे। उसी समय यहां का राजनीतिक परिदृश्य
बदल सकता था। किन्तु कल्याण सिंह के हत्या की सुपारी के अफवाह ने श्री प्रकाश
शुक्ला को STF ने मार गिराया।
बाहुबली विधायक हरि शंकर तिवारी से मुकाबला करने का जोर एक अन्य ब्राम्हण प्रत्याशी टीएन मिश्र ने अटल जी के दौर में भाजपा से किया किन्तु वह भी हार गये । पत्रकारिता जगत से एवं बड़हलगंज से मुक्तिधाम जैसे अन्तिम पड़ाव स्थल का निर्माण करा कर 2007 में चर्चा में आये वर्तमान विधायक राजेश त्रिपाठी अपनी छुपी हुई राजनैतिक कुशलता से हरि शंकर तिवारी को पहली बार हरा कर प्रदेश भर में एक अलग पहचान बनाई और मायावती सरकार में मंत्री भी बने।आज भी इस क्षेत्र का ब्राम्हण समाज राजेश त्रिपाठी एवं विनय शंकर तिवारी के खेमें में बटा हुआ है और इसी खेमें में अन्य जातियां भी मिली हुई है। आज भी चिल्लूपार का राजनैतिक परिदृश्य ब्राम्हण प्रत्याशियों पर टिका हुआ है। इसी क्रम में माफिया डान श्री प्रकाश शुक्ल के ही गांव मामखोर के भाजपा नेता दो बार जिला पंचायत सदस्य और पहलवान माया शंकर शुक्ला अपनी सौम्य छवि और युवाओं के बीच लोकप्रियता के बीच इस बार चिल्लूपार से चुनावी समर में कूद गये हैं।
विनय शंकर, माया शंकर और राजेश तिवारी अगर तीनों प्रत्याशी आने वाले विधान सभा चुनाव में उतरते हैं तो यहां की लड़ाई बड़ी दिलचस्प हो जायेगी और ब्राम्हण समाज के वोटों का बटवारा होना तय है। जिस प्रत्याशी का सर्व समाज में पैठ रहेगा वही यहां से अगला विधायक होगा।