जनता का बहुमत मनमानी करने के लिए नहीं, सरकार पुराने नेताओं की ‘नई वैरिएंट’ बनती दिख रही : वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिपाठी

मनोज कुमार त्रिपाठी 

भैरहवा। वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने और जनता की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ने राजनीतिक दलों को बहुमत मनमानी करने के लिए नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि जनता ने निरंकुशता, स्वेच्छाचारिता और कुशासन के लिए मतदान नहीं किया।

नेपाल मानव अधिकार संगठन, रुपन्देही जिला शाखा की ओर से रविवार को भैरहवा में आयोजित ‘वर्तमान संदर्भ और नागरिक सरोकार’ विषयक अंतरक्रिया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचारों पर किसी भी तरह का प्रहार स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा सरकार भी पुराने नेताओं की ‘नई वैरिएंट’ के रूप में सामने आती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि पुरानी राजनीतिक पार्टियों और नेताओं को बदनाम होने में दशकों का समय लगा, लेकिन मौजूदा सरकार के प्रति जनता में महज तीन-चार महीने में ही असंतोष दिखाई देने लगा है।

त्रिपाठी ने कहा, “जनता ने आपको मुंह बंद कराने के लिए वोट नहीं दिया है। बहुमत मनमानी करने के लिए नहीं मिला है।” उन्होंने दावा किया कि अगर मौजूदा समय में चुनाव कराया जाए तो भारी बहुमत से जीतने वाले करीब 90 प्रतिशत सांसदों की जमानत जब्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह देशभर में घूमते हैं और हजारों लोगों से संवाद करते हैं, जिससे जनता के बीच बढ़ते असंतोष का उन्हें लगातार अहसास हो रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि भय और त्रास के माहौल में लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता। लोकतंत्र नागरिक केंद्रित व्यवस्था है, इसलिए नागरिकों की आवाज सरकार तक पहुंचनी चाहिए और सरकार को उस आवाज को सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और लोकतंत्र के सामने मौजूद खतरों व चुनौतियों को समझना जरूरी है।

उन्होंने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि निजी मीडिया संस्थानों को सरकारी विज्ञापन नहीं देने संबंधी सूचना जारी कर मीडिया पर अंकुश लगाने की कोशिश की गई। उन्होंने सर्वोच्च अदालत में चौथी वरीयता के व्यक्ति को प्रधान न्यायाधीश बनाए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस संबंध में रिट दायर करने पहुंचे तो उनकी याचिका दर्ज नहीं की गई।

त्रिपाठी ने संसद को दरकिनार कर अध्यादेश के जरिए कानून में संशोधन किए जाने की भी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अध्यादेश के जरिए संविधान को कमजोर किया जा सकता है? उन्होंने सरकार से जनता की मूलभूत समस्याओं पर ध्यान देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि देश में पहले भी रासायनिक खाद की कमी थी और आज भी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। सरकार को नेपाल में रासायनिक खाद का कारखाना स्थापित करने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ाए गए करों तथा सोना-हीरा पर कर में कमी को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया।

गैस संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जनता पैसे देने के बावजूद गैस के लिए परेशान है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता को राहत दे और सुशासन सुनिश्चित करे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नेपाल मानव अधिकार संगठन रुपन्देही के सभापति प्रो. सुदर्शन प्रसाद नेपाल ने की। उपसभापति रूमा हिराचन ने स्वागत तथा सचिव राजेश जीसी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

कार्यक्रम में सिद्धार्थनगर नगरपालिका की पूर्व उपप्रमुख उमा काफ्ले, सिद्धार्थ उद्योग वाणिज्य संघ रुपन्देही के महासचिव कृष्ण प्रसाद घिमिरे, गोपाल भंडारी, धीरज मल्लिक, डॉ. शंभु गुप्ता, वीरेंद्र ज्ञवाली, विजय अधिकारी, कमल ज्ञवाली, शांता कंडेल, ललिता बछार समेत विभिन्न क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपने विचार रखे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *