दुकान की जांच की मांग, लेकिन हो रही नाली-सड़क की पड़ताल! शिकायतकर्ता ने जांच भटकाने का लगाया आरोप

मनोज कुमार त्रिपाठी 

महराजगंज। जिले के एक ग्राम पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत को लेकर चल रही जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता हरीशंकर का आरोप है कि उन्होंने जिस दुकान और फर्म की वैधता, भुगतान प्रक्रिया तथा फर्म के वास्तविक अस्तित्व की जांच की मांग की थी, उसकी बजाय जांच टीम गांव की सड़क, नाली, खड़ंजा और पंचायत भवन जैसे विकास कार्यों का निरीक्षण कर रही है। उनका कहना है कि इससे मूल शिकायत से ध्यान हटाया जा रहा है।

हरीशंकर ने बताया कि उन्हें बुधवार को ब्लॉक कार्यालय में जांच के लिए बुलाया गया था। उनके अनुसार, जांच के दौरान अधिकारियों ने उनकी शिकायत में उठाए गए मुख्य बिंदुओं पर कार्रवाई करने के बजाय गांव के विकास कार्यों का निरीक्षण शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि यह वास्तविक मुद्दे को भटकाने का प्रयास है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद उन्होंने शुक्रवार को महाराजगंज पहुंचकर जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपा। उनका दावा है कि जिलाधिकारी ने संबंधित बीडीओ को मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। हरीशंकर के अनुसार अब तक दो बार जांच हो चुकी है और तीसरी बार फिर उन्हें जांच के लिए बुलाया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक की जांच में लीपापोती की जा रही है। उनका कहना है कि यदि जांच केवल दुकान और फर्म से जुड़े दस्तावेजों तथा भुगतान के तथ्यों तक सीमित रहती तो सच्चाई सामने आ जाती। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत की भी आशंका जताई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें महाराजगंज के जिलाधिकारी पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद उन्हें न्याय मिलेगा।

इस संबंध में जब खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अमित मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता द्वारा जिलाधिकारी को पुनः प्रार्थना पत्र दिया गया है। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में मामले की दोबारा जांच कराई जाएगी तथा जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।

शिकायतकर्ता ने जिले में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अब पूरे मामले में लोगों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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