मनोज कुमार त्रिपाठी
महराजगंज जनपद के निचलौल विकास खंड अंतर्गत रेंगहिया गांव में क्षेत्र पंचायत निधि से निर्मित नाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब दो माह पहले बनी यह नाली निर्माण के कुछ ही समय बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी। मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने जांच कराने और जांच पूरी होने के बाद ही भुगतान किए जाने का आश्वासन दिया था।
बाद में जब इस संबंध में दोबारा जानकारी ली गई तो खंड विकास अधिकारी ने बताया कि जूनियर इंजीनियर को मौके पर भेजा गया था और नाली में पिलर लगाकर उसे मजबूत कर दिया गया है।
हालांकि, मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने पर नाली पहले जैसी ही दिखाई दी। निरीक्षण के दौरान कहीं भी नए पिलर लगाए जाने के स्पष्ट निशान नजर नहीं आए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि मरम्मत और मजबूती का कार्य कराया गया है, तो उसके प्रमाण जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दे रहे?

इसी विषय पर जब खंड विकास अधिकारी से कैमरे पर उनका पक्ष रखने का अनुरोध किया गया, तो उन्होंने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इस मामले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ही बयान देंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और उनके क्रियान्वयन को लेकर जवाबदेही आखिर किसकी है? क्या संबंधित विभाग के अधिकारी स्वयं जनता के सवालों का जवाब देंगे या हर प्रश्न का उत्तर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से ही अपेक्षित होगा?
यदि विभाग के अनुसार नाली की मरम्मत और पिलर लगाने का कार्य वास्तव में कराया गया है, तो उससे संबंधित अभिलेख, कार्यस्थल के फोटो अथवा अन्य साक्ष्य सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।