किसानों के लिए अभिशाप बन गया है महराजगंज जनपद का महाव नाला 

महाव तटबंध टूटने का मुख्य कारण भ्रष्ट सरकारी तंत्र 

तटबंध के मरम्मत पर हर साल करोड़ों रुपए होता है खर्च पर नतीजा सिफर 

उमेश चन्द्र त्रिपाठी 

महराजगंज! महराजगंज जनपद में सिंचाई विभाग और महाव नाले के तटबंधों की कहानी हर साल टूटने, मरम्मत में करोड़ों रुपये खर्च होने, और किसानों की फसलें बर्बाद होने की है। साथ ही, विभाग में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों से भी इसका गहरा नाता रहा है।

महराजगंज जनपद के नौतनवां तहसील अंतर्गत बरगदवा क्षेत्र से बहने वाले पहाड़ी नाले ‘महाव’ के तटबंध बारिश का दबाव नहीं झेल पाते। पिछले 15 वर्षों में यह तटबंध 50 से अधिक बार टूट चुका है।

भारी बारिश में जहां एक तरफ सैंकड़ों एकड़ धान की फसल हर साल जलमग्न (पानी में डूब) हो जाती है वहीं दूसरी तरफ पूरी जमीन सिल्ट से पट जाता है जिसके कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

तटबंध की मरम्मत पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हालात जस के तस बने रहते हैं, जिससे किसानों में भारी रोष है।

हाल ही में सिंचाई विभाग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। 

इस वीडियो में मनरेगा कार्यों के लिए 05 प्रतिशत कमीशन लिए जाने और काम दिलाने के नाम पर पैसे की वसूली का दावा किया गया है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

रोहिन नदी पर मिश्रवलिया गांव के पास बैराज के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार सामने 

आया था। डिजाइन में बदलाव करके किए गए अवैध निर्माण के कारण बाढ़ में करोड़ों रुपये का बैराज ध्वस्त हो गया था। इस मामले में शासन ने तत्कालीन मुख्य अभियंताओं और अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे।

नहरों में पानी की किल्लत ठूठीबारी, 

नौतनवां और महराजगंज के अन्य अंतिम छोर (टेल) तक नहरों का पानी समय पर न पहुंचना किसानों की सबसे बड़ी समस्या है। हालांकि, शासन समय-समय पर नहरों के संचालन और किसानों को राहत देने के लिए पंपिंग सेट और बोरिंग योजनाओं पर सब्सिडी भी देता है।

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