मनोज कुमार त्रिपाठी
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए कहा, “I am resigning from my post as Education Minister. It is for personal reasons. I thank everyone for the opportunity.” उनके इस ऐलान के बाद जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शन स्थल पर नारेबाजी, जश्न और भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिले।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके इस्तीफे की खबर सुनते ही भावुक हो गए। बताया गया कि वह फोन पर सूचना मिलने के बाद घुटनों के बल बैठ गए और ईश्वर का धन्यवाद किया। मंच पर पहुंचकर उन्होंने कहा, “झुकती है दुनिया, बस झुकाने वाला चाहिए।” उन्होंने घोषणा की कि “अभी एक विकेट गिरा है, लेकिन लड़ाई अभी बाकी है।”
अभिजीत ने कहा कि आंदोलन की दो प्रमुख मांगें अभी भी बाकी हैं। उन्होंने मांग की कि कथित घटनाओं में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए। साथ ही 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और आंदोलन में शामिल छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। उन्होंने छात्रों से डरने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद रखने की अपील करते हुए कहा कि यह आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को “इस्तीफा नहीं, इंकलाब” बताया। उन्होंने कहा कि यह देशभर के छात्रों और युवाओं के लंबे संघर्ष की जीत है। अखिलेश यादव ने कहा कि प्रयागराज, बीएचयू, दिल्ली, लखनऊ सहित पूरे देश के युवाओं ने इस आंदोलन को मजबूती दी। उन्होंने सरकार से प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक व्यापक सुधार करने, पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम सभी राजनीतिक दलों के लिए भी एक बड़ा सबक है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शिक्षा व्यवस्था के पुनर्निर्माण की दिशा में एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम है। उन्होंने आंदोलन में शामिल सभी छात्रों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने लोकतंत्र, संविधान और देश के भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष किया। राहुल गांधी ने सरकार से मांग की कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर कथित कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं तथा प्रधानमंत्री छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत करार दिया। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद सरकार को जनता की आवाज़ सुननी पड़ी। केजरीवाल ने कहा कि अब सरकार को NEET सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में व्यापक सुधार करना चाहिए ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों और किसी भी छात्र का भविष्य खतरे में न पड़े।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां विपक्ष इसे छात्रों के आंदोलन की ऐतिहासिक जीत बता रहा है, वहीं आंदोलनकारी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी शेष मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।