आरपीपी के ताहिर अली का अनोखा राजनीतिक संदेश
“हिंदू-मुस्लिम नाखून और मांस जैसे हों”—नेपाल में धार्मिक सह-अस्तित्व की नई बहस
मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू! राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) जहां एक ओर हिंदू राष्ट्र और राजशाही की वकालत करती है, वहीं दूसरी ओर उसी पार्टी से एक मुस्लिम नेता का संसद पहुंचना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। ताहिर अली, जो रूपन्देही जिले से आते हैं, को पार्टी ने समानुपातिक प्रतिनिधित्व के तहत प्रतिनिधि सभा में भेजा है।
करीब तीन दशकों से सामाजिक सेवा और राजनीति में सक्रिय ताहिर अली का मानना है कि हिंदू और मुसलमानों के रिश्ते “नाखून और मांस” जैसे मजबूत होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर नेपाल हिंदू राष्ट्र बनता है, तो मुस्लिम समुदाय को इससे कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

अली का दावा है कि रूपन्देही में मुस्लिम समुदाय ने आरपीपी को सबसे अधिक समर्थन दिया है। उनका कहना है कि पार्टी को मुस्लिम समाज ने बेहतर तरीके से समझा है और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के बीच आपसी भरोसा बना है।
उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल के राजाओं ने अतीत में मुस्लिम समुदाय को सम्मान दिया, यहां तक कि महल के सामने मस्जिद का निर्माण भी कराया गया। अली के अनुसार, हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पहचान और परंपरा से जुड़ी है, न कि किसी धर्म विशेष के खिलाफ।
63 वर्षीय ताहिर अली, जो पार्टी के लुम्बिनी प्रांत के सहायक महासचिव भी हैं, मानते हैं कि देश में 85 प्रतिशत हिंदू आबादी होने के कारण हिंदू राष्ट्र का गठन होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे अन्य धर्मों के लोगों के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
संसद में अपनी प्राथमिकताओं को लेकर अली ने कहा कि वे किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएंगे। बेहतर बीज, उचित मूल्य और फसल सुरक्षा उनके एजेंडे में शामिल हैं। साथ ही, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को हर नागरिक तक पहुंचाने पर जोर दिया।
अली ने अंत में कहा कि गीता और कुरान का सार एक ही है और देश में स्थायी शांति और सद्भाव के लिए दोनों समुदायों का साथ रहना जरूरी है।