फरार भतीजी दिव्या अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर
पिता-पुत्र सहित तीन लोगों की हत्या में हंस नगर पुलिया तिकुनिया के पास से पुलिस ने दबोचा
नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में हुई सनसनीखेज वारदात का मामला
मनोज कुमार त्रिपाठी
लखनऊ! सआदतगंज थाना क्षेत्र के नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में 26 अक्टूबर 2026 की सुबह चबूतरा बनाने और कार खड़ी करने के विवाद में एक ही परिवार के तीन लोगों की हुई गोली मारकर हत्या के मामले में फरार चल रहे 25 हजार रुपए के इनामी नौबस्ता के ब्राह्मणी टोला निवासी हिस्ट्रीशीटर राजेश शुक्ला को शनिवार को इंस्पेक्टर सआदतगंज अशोक कुमार सोनकर की टीम ने हंस नगर पुलिया तिकुनिया के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित घटना के दिन से ही फरार चल रहा था। इसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अफसरों ने 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। इससे पहले मुख्य हत्यारोपी ऋषभ शुक्ला सहित अन्य को गिरफ्तार कर पुलिस सलाखों के पीछे भेज चुकी है, जबकि राजेश शुक्ला व उसकी भतीजी दिव्या फरार चल रहे थे।
सनद रहे कि 26 अक्टूबर 2026 को सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे सआदतगंज क्षेत्र के नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में चबूतरा बनाने और कार खड़ी करने के विवाद में पड़ोस में रहने वाले मर्चेंट नेवी से निकाले गए निशानेबाज ऋषभ शुक्ला ने 62 वर्षीय शिवाजी तिवारी, उनके 55 वर्षीय भाई शिवेंद्र उर्फ शंभू तिवारी व 30 वर्षीय बेटे सुयश तिवारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में घरवालों ने हिस्ट्रीशीटर राजेश शुक्ला उर्फ तन्नु बाबू, मुख्य आरोपित ऋषभ शुक्ला, दिनेश शुक्ला, मुन्ना बाबू, दिव्या, प्रिया व अदिति के खिलाफ नामजद हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस मुख्य आरोपित ऋषभ शुक्ला सहित आधा दर्जन आरोपितों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा था, लेकिन इस सनसनीखेज मामले की अगुवाई करने वाला हिस्ट्रीशीटर राजेश शुक्ला व उसकी भतीजी दिव्या फरार हो गए थे। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस के आलाधिकारियों ने दोनों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।
बताया जा रहा था कि फरार चल रहा आरोपित हिस्ट्रीशीटर राजेश शुक्ला अदालत में सरेंडर करने की तैयारी कर रहा था कि इससे पहले इंस्पेक्टर सआदतगंज अशोक कुमार सोनकर की टीम ने मुखबिर की सूचना पर उसे धर दबोचा।
बताया जा रहा है कि इस इस तिहरे हत्याकांड में इंस्पेक्टर रहे संतोष कुमार आर्य व कश्मीरी मोहल्ला चौकी प्रभारी अजय कुमार चौरसिया की भूमिका पर सवाल खड़े हुए तो जांच-पड़ताल के पुलिस कमिश्नर तरूण गाबा ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
गौर करें तो जब भी शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में कोई बड़ी वारदात हुई तो अपनी नाकामी छिपाने के जिम्मेदार अफसरों ने सबसे पहले स्टेशन अफसर या फिर स्थानीय चौकी प्रभारियों पर चाबुक चला, लेकिन कड़वा सच यह भी है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार आलाधिकारियों की भी जवाबदेही जरूर होती है?
बताया जा रहा है कि मृतक शिवाजी तिवारी और कातिल ऋषभ के बीच चबूतरा निर्माण और कार खड़ी करने को लेकर पिछले कुछ दिनों से कई बार पुलिस अधिकारियों से लेकर उनके मातहतों के पास शिकायत हुई इसके बाद भी मूकदर्शक ऐसे बने कि ऋषभ शुक्ला के हाथों हंसता-खेलता एक परिवार उजड़ गया।
बताया जा रहा है बीते तीन दशक पहले मृतक शिवाजी तिवारी के पिता चन्द्रभान तिवारी ने ही मुख्य आरोपित ऋषभ शुक्ला के दादा को अपनी कॉलोनी में बसाकर रहने का ठिकाना दिया था, इसके बाद भी दो गज जमीन के खातिर ऋषभ शुक्ला के सिर पर ऐसा खून सवार हुआ कि पिता-पुत्र सहित तीन लोगों को गोलियों से भून कर नृशंस तरीके से हत्या कर दी।







