नेपाल विदेश मंत्री बोले—नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद नहीं ठुकराई, पुनर्निर्माण के लिए भी चाहिए वैश्विक सहयोग
मनोज कुमार त्रिपाठी
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में भीषण बाढ़ से मची तबाही के बीच भारत ने राहत और बचाव अभियान में सहयोग और तेज कर दिया है। भारत ने 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री के साथ चौथी उड़ान नेपाल के लिए रवाना की है। भारतीय वायुसेना का C-130 विमान राहत सामग्री के साथ विशेष तकनीकी विशेषज्ञों और बचाव उपकरणों को लेकर पहुंच रहा है।
इस उड़ान में टनल रेस्क्यू के लिए तकनीकी टीम, सर्च एंड रेस्क्यू उपकरण, डीएनए विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ और अन्य जरूरी राहत सामग्री शामिल है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की 11 सदस्यीय विशेष तकनीकी टीम को सुरंग बचाव अभियान में सहायता के लिए भेजा गया है।
इसी बीच नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने उन खबरों को सिरे से खारिज किया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहायता ठुकरा दी है। उन्होंने कहा कि तबाही का पैमाना बेहद बड़ा है और नेपाल को राहत-बचाव के साथ-साथ पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होगी।

विदेश मंत्री ने बताया कि नेपाल पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क में है। सरकार ने सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, प्रभावित क्षेत्रों में जीवित लोगों का पता लगाने वाली तकनीक, फोरेंसिक और डीएनए जांच जैसी विशेष सहायता की जरूरत बताई है।
नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत से अब तक 57 टन से अधिक राहत सामग्री प्राप्त हो चुकी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों से भी सहायता मिल रही है। बाढ़ से सड़क, पुल, मकान और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को हुए नुकसान के आकलन के बाद पुनर्निर्माण के लिए आगे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मांगा जा सकता है।
भारत की चौथी राहत उड़ान और नेपाल की ओर से विशेष तकनीकी सहायता की मांग के बीच दोनों देशों का सहयोग आपदा राहत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता नजर आ रहा है।


